एक महीने पहले रोजी की तलाश में छत्तीसगढ़ गया था बगोदर का वीरेंद्र, अब घर लौटेगा शव*
डीजे न्यूज, बगोदर (गिरिडीह) : जिस घर से करीब एक महीने पहले 27 वर्षीय वीरेंद्र महतो रोजी-रोटी कमाने और परिवार का भविष्य संवारने के लिए छत्तीसगढ़ रवाना हुआ था, अब उसी घर में उसकी मौत की खबर से चीख-पुकार मची है। बगोदर थाना क्षेत्र की कुसमरजा पंचायत के खटैया गांव निवासी केशव महतो के पुत्र वीरेंद्र महतो की छत्तीसगढ़ में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वीरेंद्र रामचंद्रा कंपनी में मजदूरी करने के लिए छत्तीसगढ़ गया था।मंगलवार को मौत की खबर गांव पहुंचते ही मातम पसर गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बेटे से परिवार को सहारे और खुशहाल भविष्य की उम्मीद थी, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
मौत की वजह बना रहस्य
वीरेंद्र की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। परिजनों के अनुसार, कंपनी की ओर से तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी गई है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह क्या है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल परिजन पूरी घटना की सही जानकारी और शव के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
पत्नी और मासूम बेटे की जिंदगी में छाया अंधेरा
वीरेंद्र अपने पीछे पत्नी नीता देवी और सात वर्षीय इकलौते पुत्र निखिल कुमार को छोड़ गए हैं। परिवार का सहारा बने वीरेंद्र की मौत से पत्नी और मासूम बेटे के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। बेटे निखिल ने अभी ठीक से दुनिया को समझना भी शुरू नहीं किया था कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया।
प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर फिर उठे सवाल
वीरेंद्र की मौत ने एक बार फिर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता को सामने ला दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मजदूर रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन हादसे या मौत की स्थिति में उनके परिवारों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
सिकंदर अली और बरसात अंसारी ने पहुंचकर बंधाया ढांढस
वीरेंद्र की मौत की सूचना मिलने पर प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली और पंचायत समिति सदस्य बरसात अंसारी मृतक के घर पहुंचे। दोनों ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।सिकंदर अली ने कहा, “रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ गए वीरेंद्र की मौत बेहद दुखद है। प्रशासन से मांग है कि शव को जल्द से जल्द गांव लाने की व्यवस्था की जाए और पीड़ित परिवार को नियमानुसार सरकारी सहायता एवं मुआवजा दिलाया जाए।”
बरसात अंसारी ने कहा, “वीरेंद्र की असमय मौत से पूरा गांव दुखी है। प्रशासन को तत्काल पहल करते हुए शव को गांव लाने और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।”
फिलहाल खटैया गांव की निगाहें वीरेंद्र के शव के गांव लौटने पर टिकी हैं। परिवार अंतिम विदाई की तैयारी में है, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर है।