…यहां दांव पर होगी बाबूलाल-कल्पना की साख
गिरिडीह विधानसभा उप चुनाव
दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता, देवभूमि झारखंड न्यूज, गिरिडीह : सूबे के नगर विकास मंत्री एवं झामुमो के संकट मोचक सुदिव्य कुमार सोनू के दिवंगत होने से खाली हुए उनके गिरिडीह विधानसभा सीट में उप चुनाव होना है। दिवंगत सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा के राजनीति में एंट्री लेने से यह साफ हो गया है कि श्वेता शर्मा ही झामुमो और इंडी गठबंधन की प्रत्याशी होंगी। भाजपा और जेएलकेएम से कौन लड़ेगा, यह अभी तय नहीं है। खैर, गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में झामुमो और भाजपा से प्रत्याशी जो भी हो, इतना तय है कि इस चुनाव में राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं झामुमो की स्टार लीडर और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की नैया पार कराने का जिम्मा बाबूलाल मरांडी और झामुमो प्रत्याशी की नैया पार कराने की जिम्मेवारी कल्पना मुर्मू सोरेन की होंगी। अब बाजी कौन मारेगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।
गिरिडीह बाबूलाल मरांडी का गृह जिला है। उनके गृह जिले के गांडेय विधानसभा सीट से दो-दो बार जीतकर कल्पना सोरेन बाबूलाल और भाजपा को पहले ही झटका दे चुकी हैं। कल्पना के चुनाव की कमान मंत्री सुदिव्य सोनू ने दोनों बार संभाली थी। अब दिवंगत हो चुके सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा के चुनाव की कमान पूरी तरह से कल्पना सोरेन के पास होगी। ऐसे में इस उप चुनाव में रोचक राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भाजपा प्रत्याशी के लिए अभी से फील्डिंग सजाना शुरू कर दिया है। वह लगातार गिरिडीह में कैंप कर रहे हैं। मंडल स्तर की बैठकों में भी शामिल होकर कार्यकर्ताओ में जोश भर रहे हैं। बाबूलाल और भाजपा के लिए सबसे चुनौती है भितरघात को रोकना। टिकट के लिए भाजपा में एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति है। ऐसी स्थिति में टिकट की घोषणा के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण होगा। बाबूलाल इससे कैसे निपटते हैं, यह देखना होगा।
दूसरी ओर कल्पना सोरेन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी वैसे शहरी वोटरों जिन्होंने पिछले चुनाव में झामुमो को वोट दिए थे, उन्हें समेटना। ऐसे वोटरों में से कुछ ऐसे हैं जिन्हें झामुमो से नाराजगी है। कल्पना सोरेन को ऐसे शहरी वोटरों की नाराजगी संवाद कर दूर करनी होगी। कल्पना सोरेन के समक्ष बड़ी चुनौती यह भी है कि जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम को झामुमो के गढ़ पीरटांड़ में रोकना। पीरटांड़ के कुर्मी वोटर पिछले चुनाव में जयराम महतो के साथ चले गए थे। इसका नुकसान झामुमो को हुआ था और झामुमो प्रत्याशी सुदिव्य सोनू की जीत का अंतर काफी घट गया था।
बहरहाल, कल्पना सोरेन ने अभी तक गिरिडीह में मोर्चा नहीं संभाला है। हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद कल्पना ने जिस तरह से पार्टी को संकट से उबारा था, उसे देखते हुए झामुमो समर्थकों को उम्मीद है कि कल्पना सोरेन इस जंग में भी झामुमो को जीत दिलाएगी।
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र का 2000 से 2024 तक का चुनाव परिणाम एक नजर में
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2024 का चुनाव परिणाम
सुदिव्य कुमार सोनू झामुमो : 94, 042
निर्भय कुमार शाहाबादी भाजपा : 90, 204
नवीन आनंद चौरसिया जेएलकेएम : 10, 787
सुनैना पाठक निर्दलीय : 2635
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2019 का चुनाव परिणाम
सुदिव्य कुमार सोनू झामुमो : 80, 871
निर्भय कुमार शाहाबादी भाजपा : 64, 987
चुन्नूकांत झाविमो : 6, 903
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2014 का चुनाव परिणाम
निर्भय कुमार शाहाबादी भाजपा : 57, 450
सुदिव्य कुमार सोनू झामुमो : 47, 517
बाबूलाल मरांडी झाविमो : 26, 665
रूमा सिंह कांग्रेस : 2,998
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2009 का चुनाव परिणाम
निर्भय कुमार शाहाबादी भाजपा : 28, 771
मुन्ना लाल निर्दलीय : 21, 669
चंद्रमोहन प्रसाद भाजपा : 18, 283
विनोद कुमार आजसू : 11, 737
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2005 का चुनाव परिणाम
मुन्ना लाल झामुमो : 31, 895
चंद्रमोहन प्रसाद भाजपा : 24, 920
निर्भय कुमार शाहाबादी : 21, 029
मनोज साहू बसपा : 8, 214
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र 2000 का चुनाव परिणाम
चंद्रमोहन प्रसाद भाजपा : 24, 722
निर्भय कुमार शाहाबादी राजद : 23, 697
ज्योतिंद्र प्रसाद कांग्रेस : 14, 804
ओमीलाल आजाद भाकपा : 3, 197