सेल, बोकारो के अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम शुरू

सेल, बोकारो के अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम शुरू

डीजे न्यूज, धनबाद: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) धनबाद के मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग (डीएमएसआईई) की ओर से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), बोकारो स्टील प्लांट के मध्य एवं वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम (ईडीपी) बुधवार को बोकारो स्टील प्लांट में शुरू हुआ।

“डेटा एनालिटिक्स फॉर प्रोजेक्ट एंड फाइनेंशियल मैनेजमेंट विद एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 30 अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन अनीमा कुशवाहा, मुख्य महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट्स), बोकारो स्टील प्लांट ने किया। यह प्रशिक्षण 22 से 24 जुलाई तक चलेगा और इसका प्रायोजन सेल, बोकारो द्वारा किया जा रहा है।

तीन दिनों में कुल 12 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें स्टील उद्योग में स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का उपयोग, रिस्क एनालिसिस एवं सिमुलेशन मॉडलिंग, फाइनेंशियल स्टेटमेंट एनालिसिस, कैपिटल बजटिंग, सोशल कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस, डेटा एनालिटिक्स, कॉस्ट इश्यूज, सोर्सेज ऑफ फाइनेंस तथा बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में आधुनिक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।

कार्यक्रम के पहले दिन प्रो. जे. के. पटनायक, एमेरिटस प्रोफेसर, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने “स्टील इंडस्ट्री में स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट” तथा “स्टील प्रोजेक्ट्स में कॉस्ट इश्यूज और सोर्सेज ऑफ फाइनेंस” विषयों पर व्याख्यान दिया। इसके बाद प्रो. संदीप मंडल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, डीएमएसआईई ने “इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के उपयोग” पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रश्मि सिंह ने कहा, “इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को डेटा आधारित निर्णय लेने, रिस्क एनालिसिस और आधुनिक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टूल्स के व्यावहारिक उपयोग से जोड़ना है। इससे वे अपने संस्थान में बेहतर योजना और प्रभावी प्रबंधन कर सकेंगे।”

कार्यक्रम समन्वयक प्रो. निलाद्रि दास ने कहा, “कार्यक्रम में फाइनेंशियल मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स को एक साथ जोड़कर ऐसे व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में किया जा सकता है। हमें विश्वास है कि इससे प्रतिभागियों की निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता दोनों मजबूत होंगी।”

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