विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर लटानी में डालसा का जागरूकता अभियान, बताए तंबाकू के दुष्प्रभाव

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर लटानी में डालसा का जागरूकता अभियान, बताए तंबाकू के दुष्प्रभाव

डीजे न्यूज, पूर्वी टुंडी (धनबाद) : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) धनबाद के सचिव मयंक तुषार टोपनो के निर्देशानुसार बुधवार को पूर्वी टुंडी प्रखंड के लटानी पंचायत अंतर्गत सिंगराईडीह गांव में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 90 डेज आउटरिच प्रोग्राम के तहत विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर केंद्रित था।

डालसा के पीएलवी ओमप्रकाश दास, रमेश किस्कू, प्रदीप गोराई तथा रेबोती मरांडी ने आदिवासी टोला के ग्रामीणों को बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस की स्थापना वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की गई थी। तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों और बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुए इस विशेष दिवस की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा तंबाकू सेवन को कम करने के लिए वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना है।

उन्होंने बताया कि तंबाकू के दो प्रकार होते हैं—धूम्रपान और धूम्ररहित। इनमें सिगरेट, बीड़ी, सिगार, हुक्का, खैनी, गुटका, जर्दा और पान मसाला आदि शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। तंबाकू में निकोटीन के साथ कई रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जिनमें अनेक विषैले और कैंसरकारी तत्व शामिल होते हैं। इससे हृदय, फेफड़े और रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं तथा कई गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं।

ग्रामीणों को बताया गया कि तंबाकू सेवन व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से भी प्रभावित करता है तथा संबंधों को कमजोर करता है। बच्चों को विशेष रूप से तंबाकू सेवन से दूर रखने की अपील की गई।

शिविर के दौरान झालसा द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों के लिए मुआवजा, संवाद योजना, जागृति योजना, डॉन योजना, आशा योजना और वीर परिवार योजना के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। साथ ही लोक अदालत, नेशनल लोक अदालत और विधिक सहायता केंद्र के लाभों की जानकारी दी गई।

ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि गरीब और जरूरतमंद लोग किस प्रकार निःशुल्क अधिवक्ता की सेवा प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी कानूनी सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी देते हुए कहा गया कि इसके माध्यम से ग्रामीण घर बैठे सहायता प्राप्त कर सकते हैं। सुदूरवर्ती क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना ही इस शिविर का मुख्य उद्देश्य रहा।

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