पाइप की अंदरूनी दीवार पर वेल्डिंग के बाद बनने वाले अतिरिक्त वेल्ड बीड हटाने के लिए आईआईटी (आईएसएम) ने विकसित की तकनीक, मिला पेटेंट
डीजे न्यूज, धनबाद : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद में हुए एक रिसर्च से पाइप की अंदरूनी दीवार पर वेल्डिंग के बाद बनने वाले अतिरिक्त वेल्ड मटेरियल को हटाने के लिए एक उपयोगी तकनीक विकसित की गई है। इस तकनीक को सेंट्रीफ्यूगल फोर्स की मदद से काम करने वाले एक खास ग्राइंडिंग उपकरण के रूप में विकसित किया गया है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने अब इस इनोवेशन को पेटेंट भी प्रदान कर दिया है।
“एन इंटरनल ग्राइंडिंग अपरेटस टू रिमूव वेल्ड बीड फ्रॉम इनर वॉल ऑफ पाइप विद जेनरेटेड सेंट्रीफ्यूगल फोर्स” नाम के इस इनोवेशन का इस्तेमाल पाइप की अंदरूनी सतह पर मौजूद वेल्ड बीड को हटाने में किया जा सकता है। वेल्डिंग के दौरान पाइप की अंदरूनी दीवार पर बचा अतिरिक्त मटेरियल फ्लूड के फ्लो में रुकावट पैदा कर सकता है और पाइपलाइन की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यह तकनीक पाइप की अंदरूनी सतह को बेहतर बनाने और वेल्ड बीड हटाने से जुड़े इंडस्ट्रियल काम में उपयोगी हो सकती है।
इस उपकरण में एक मोटर, रोटेटिंग हब, स्प्रिंग पर लगे चार ग्राइंडिंग स्टोन, बेयरिंग, डायमीटर एडजस्टर और सपोर्ट मैकेनिज्म शामिल हैं। मोटर के घूमने पर सेंट्रीफ्यूगल फोर्स के कारण स्प्रिंग फैलते हैं और ग्राइंडिंग स्टोन पाइप की अंदरूनी सतह के संपर्क में आ जाते हैं। इसके जरिए अंदर की सतह पर मौजूद वेल्ड बीड को ग्राइंड किया जा सकता है।
इस डिजाइन की एक खासियत इसका एडजस्टेबल मैकेनिज्म है, जिससे ग्राइंडिंग स्टोन को पाइप के अंदरूनी डायमीटर के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है। वहीं, बेयरिंग को इस तरह शामिल किया गया है कि ग्राइंडिंग के दौरान पाइप की दीवार को नुकसान से बचाने में मदद मिले। इस तरह यह उपकरण अलग-अलग डायमीटर वाले पाइप में इंटरनल ग्राइंडिंग के लिए संभावित इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन उपलब्ध कराता है।
इस इनोवेशन को पेटेंट नंबर 601996 प्रदान किया गया है। पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार ने 9 सितंबर 2026 को पेटेंट ग्रांट किया। यह पेटेंट 13 अगस्त 2025 की फाइलिंग डेट से 20 साल की अवधि के लिए प्रदान किया गया है।
इस रिसर्च टीम में प्रो. आलोक कुमार दास, प्रो. पवन कुमार सिंह, प्रो. विवेक बाजपेयी और रिसर्च स्कॉलर अभिप्सा कर शामिल हैं। पेटेंट सर्टिफिकेट में चारों को इन्वेंटर के तौर पर दर्ज किया गया है। प्रो. आलोक कुमार दास आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन (इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस) हैं और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के फैकल्टी मेंबर हैं। प्रो. विवेक बाजपेयी और प्रो. पवन कुमार सिंह इसी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, जबकि अभिप्सा कर रिसर्च स्कॉलर हैं।
यह पेटेंट आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में इंडस्ट्री से जुड़ी इंजीनियरिंग समस्याओं के लिए प्रैक्टिकल टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में किए जा रहे रिसर्च का एक और उदाहरण है।