मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर भौरा में उग्र आंदोलन, ट्रांसपोर्टिंग व कांटा घर ठप

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मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर भौरा में उग्र आंदोलन, ट्रांसपोर्टिंग व कांटा घर ठप

डीजे न्यूज तिसरा,धनबाद : भौरा और आसपास के क्षेत्रों के रैयतों ने अपनी जमीन के बदले लंबित मुआवजा और नियोजन की मांग को लेकर शनिवार को परासियाबाद के समीप कंपनी की ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था एवं कांटा घर को एक साथ बंद करा दिया। अचानक हुए इस आंदोलन से पूरे क्षेत्र में कोयला परिवहन और आउटसोर्सिंग परियोजना का काम पूरी तरह बाधित हो गया।

आंदोलन कर रहे ग्रामीण रैयतों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 से उनकी जमीन पर फोर पैच, सीटू पैच, थ्री पिट आउटसोर्सिंग परियोजना और बीएएल आउटसोर्सिंग परियोजना संचालित की जा रही है, साथ ही कोयला उत्पादन भी जारी है, लेकिन अब तक न तो उन्हें नौकरी मिली और न ही उचित मुआवजा दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 20 से 25 एकड़ जमीन बिना उचित मुआवजा दिए जबरन अधिग्रहित की गई है। इतना ही नहीं, परियोजना के दौरान कई घरों को भी तोड़ दिया गया, लेकिन उसका भी कोई मुआवजा आज तक नहीं दिया गया।

रैयतों ने बताया कि वे पिछले 15–16 वर्षों से लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हर बार प्रबंधन से वार्ता होती है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकलता और उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे परियोजना के विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल अपने हक की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि झारखंड विधानसभा की कमेटी ने भी मामले की जांच कर मुआवजा भुगतान का निर्देश दिया था, इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बीते गुरुवार को महाप्रबंधक कार्यालय में वार्ता हुई थी, लेकिन उसमें भी कोई निर्णय नहीं निकल सका।

ग्रामीणों ने 20 दिन पूर्व नोटिस देकर चेतावनी दी थी कि यदि मुआवजा नहीं दिया गया तो काम बंद किया जाएगा, जिसके बाद यह आंदोलन किया गया।

वहीं, अपर महाप्रबंधक सुशील कुमार ने कहा कि ग्रामीणों से वार्ता हुई है और उन्हें जमीन के कागजात व वंशावली जमा करने को कहा गया है। जांच के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया की जाएगी।

इधर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बिना कागजात की जांच के ही कंपनी ने उनकी जमीन पर परियोजना कैसे शुरू कर दी। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

आंदोलन में कुलदीप महतो, देवीलाल महतो, भूषण महतो, जगबंधु महतो, मनोज महतो, प्रयाग महतो, सुशील महतो सहित कई ग्रामीण शामिल थे।

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