दो प्रख्यात वैज्ञानिकों ने छात्रों को किया प्रेरित
डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम के तहत नवप्रवेशित स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और पीएचडी छात्रों को देश के दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर मिला। इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के अध्यक्ष एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. शेखर सी. मांडे तथा आयुष विशिष्ट वैज्ञानिक चेयर, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं टीसीएस रिसर्च एंड इनोवेशन में लाइफ साइंसेज रिसर्च की सलाहकार डॉ. शर्मिला मांडे ने छात्रों को विज्ञान, शोध और नवाचार के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।
प्रो. शेखर सी. मांडे ने पेनमैन ऑडिटोरियम में नवप्रवेशित यूजी छात्रों के लिए दो अलग-अलग सत्रों को संबोधित किया। उन्होंने दोपहर 4 बजे से 5 बजे तक सेक्शन A, B, C एवं D तथा शाम 6 बजे से 7 बजे तक सेक्शन E, F, G एवं H के छात्रों से संवाद किया। इससे पहले उन्होंने सुबह 10:15 बजे से 11:30 बजे तक सभी पीएचडी शोधार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र में हिस्सा लिया।
अपने संबोधन में प्रो. मांडे ने कहा कि विज्ञान केवल करियर बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के विकास और मानवता की सेवा का सशक्त साधन है। उन्होंने शोधार्थियों से जिज्ञासु बने रहने और वैज्ञानिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “वैज्ञानिक प्रगति ने मानव जीवन को नई संभावनाएं दी हैं, लेकिन इसके साथ वैज्ञानिकों की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। शोध का उद्देश्य हमेशा समाज के व्यापक हित में होना चाहिए।”
मौलिक शोध के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “आज जिस शोध का कोई तात्कालिक उपयोग नहीं दिखता, वही भविष्य में बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों की नींव बन सकता है।”
उन्होंने शोधार्थियों को बहुविषयक सोच विकसित करने, नवाचार अपनाने और धैर्य के साथ शोध कार्य करने की सलाह दी। सत्र के दौरान शोधार्थियों ने वैज्ञानिक करियर, शोध की चुनौतियों और नए अवसरों से जुड़े प्रश्न भी पूछे।
वहीं, गोल्डन जुबली लेक्चर थिएटर में आयोजित सत्र में डॉ. शर्मिला मांडे ने नवप्रवेशित पीजी छात्रों को “थिंक बियॉन्ड योर डिसिप्लिन: इम्पोर्टेंस ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च टू सॉल्व रियल-वर्ल्ड प्रॉब्लम्स” विषय पर संबोधित किया।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय से संभव नहीं है, बल्कि विभिन्न विषयों के समन्वय से ही प्रभावी समाधान निकाले जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अपनी विषय सीमा से बाहर निकलकर सोचिए। स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और सामाजिक समानता जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को मिलकर काम करना होगा।”
संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) का उल्लेख करते हुए उन्होंने छात्रों से नवाचार और अंतरविषयक शोध के माध्यम से समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने छात्रों को जिज्ञासु, जिम्मेदार और नवाचारी बनने का संदेश दिया। ओरिएंटेशन कार्यक्रम के इन प्रेरक सत्रों ने यूजी, पीजी और पीएचडी छात्रों को विज्ञान और शोध के प्रति नई सोच तथा व्यापक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।