प्रो. रश्मि सिंह ने ऑस्ट्रिया में साइबर रिस्क रिसर्च का किया प्रदर्शन

प्रो. रश्मि सिंह ने ऑस्ट्रिया में साइबर रिस्क रिसर्च का किया प्रदर्शन

डीजे न्यूज, धनबाद: ऑस्ट्रिया के वियना विश्वविद्यालय में 12 से 17 जुलाई तक आयोजित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ऑपरेशनल रिसर्च सोसाइटीज (आईफोर्स-2026) के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. रश्मि सिंह ने
संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। दुनिया के प्रतिष्ठित शोध सम्मेलनों में शामिल इस आयोजन का विषय “डिसीजन सपोर्ट फॉर ए सस्टेनेबल वर्ल्ड” था, जिसमें ऑपरेशनल रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनालिटिक्स और डिसीजन साइंसेज के क्षेत्र में नवीन शोधों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में प्रो. रश्मि सिंह ने “साइबर वॉर्स एंड बजट्स: ए गेम थ्योरी गाइड टू स्मार्टर सिक्योरिटी स्पेंडिंग” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। यह शोध अनिश्चित डिजिटल परिवेश में साइबर सुरक्षा निवेश, साइबर रेजिलिएंस और रणनीतिक निर्णय लेने से जुड़ा है। इसमें ऐसे डिसीजन सपोर्ट फ्रेमवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया है, जो संस्थानों को साइबर सुरक्षा पर बेहतर निवेश करने और बदलते साइबर खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद कर सकते हैं।

यह प्रस्तुति उनके हाल ही में प्रकाशित शोधपत्र के विस्तारित संस्करण पर आधारित थी, जिसे उन्होंने अपने पीएचडी शोधार्थी शांतनु मंडल के साथ मिलकर तैयार किया है। यह शोध वेब ऑफ साइंस की क्यू-1 श्रेणी की प्रतिष्ठित जर्नल रिलायबिलिटी इंजीनियरिंग एंड सिस्टम सेफ्टी (इम्पैक्ट फैक्टर 11.0) में प्रकाशित हुआ है।

सम्मेलन के दौरान प्रो. रश्मि सिंह को “गेम थ्योरी एंड इकोनॉमिक मॉडल्स” विषयक अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करने के लिए भी आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं के बीच अकादमिक चर्चा का संचालन किया। इसके अलावा उन्होंने ग्लोबल वीमेन इन ऑपरेशनल रिसर्च (ग्लो) पहल में भी भाग लिया, जिसका उद्देश्य महिला शोधकर्ताओं के बीच वैश्विक सहयोग, मार्गदर्शन और नेतृत्व को बढ़ावा देना है।

प्रो. रश्मि सिंह ने कहा, “आईफोर्स-2026 में अपना शोध प्रस्तुत करना और दुनिया भर के अग्रणी शोधकर्ताओं के साथ विचार साझा करना मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक अनुभव रहा। इस सम्मेलन ने साइबर रिस्क, डिसीजन साइंस और ऑपरेशनल रिसर्च के उभरते विषयों पर वैश्विक स्तर पर संवाद का अवसर प्रदान किया तथा अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग की नई संभावनाएं भी खोलीं।”

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