यूपीएससी में सफलता रटने से नहीं, सर्वांगीण व्यक्तित्व से मिलती है : कर्ण सत्यार्थी

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यूपीएससी में सफलता रटने से नहीं, सर्वांगीण व्यक्तित्व से मिलती है : कर्ण सत्यार्थी

कोचिंग एक व्यक्तिगत विकल्प है, लेकिन कड़ी मेहनत और वित्तीय स्थिरता सफलता की आधारशिला

अपनी क्षमता आंकने के लिए दो गंभीर प्रयास पर्याप्त हैं, साथ ही एमबीए जैसा बैकअप विकल्प रखना भी जरूरी

डीजे न्यूज तिसरा(धनबाद) : बीआईटी सिंदरी में डेवलपमेंट सेंटर (CDC)द्वारा शनिवार को सिविल सेवा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक विशेष प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कर्ण सत्यार्थी (IAS, UPSC CSE’15, AIR-09) ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यूपीएससी में सफलता केवल रटने से नहीं, बल्कि एक सर्वांगीण व्यक्तित्व विकसित करने से मिलती है।

आईआईटी खड़गपुर से माइनिंग इंजीनियरिंग करने के बाद देश के शीर्ष सिविल सेवकों में स्थान बनाने तक के अपने सफर को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा आईआईटी-जेईई जितनी ही चुनौतीपूर्ण है, लेकिन एक “बेहतर इंसान” और “समस्या समाधानकर्ता” बनने की चाह रखने वालों के लिए अत्यंत फलदायी है।

तैयारी के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करते हुए सत्यार्थी ने ‘स्टैटिक’ और ‘डायनेमिक’ विषयों के बीच संतुलन बनाने की सलाह दी। उन्होंने विषयों पर अध्याय-वार मजबूत पकड़ बनाने पर जोर दिया और कहा कि कोचिंग एक व्यक्तिगत विकल्प है, लेकिन कड़ी मेहनत और वित्तीय स्थिरता सफलता की आधारशिला हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अपनी क्षमता आंकने के लिए दो गंभीर प्रयास पर्याप्त हैं, साथ ही एमबीए जैसा बैकअप विकल्प रखना भी जरूरी है।

परीक्षा के विभिन्न चरणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि सीसैट (CSAT) केवल क्वालिफाइंग है, जबकि मेन्स परीक्षा परिष्कृत लेखन शैली की मांग करती है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और कानूनी दृष्टिकोण का समावेश आवश्यक है।

सत्र में उन्होंने “जमीनी जुड़ाव” और सांस्कृतिक जागरूकता पर भी विशेष बल दिया। छात्रों को झारखंड की स्थानीय विरासत, जैसे मंदार वाद्ययंत्र की वैज्ञानिक विशेषता और कुड़ुख भाषा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने, समय का सदुपयोग करने और अपने विचारों को नवाचार में बदलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) पंकज राय (निदेशक, बी.आई.टी. सिंदरी), प्रो. (डॉ.) घनश्याम (अध्यक्ष, सी.डी.सी.), प्रो. प्रफुल्ल कुमार शर्मा (विभागाध्यक्ष, असैनिक अभियंत्रण विभाग), प्रो. (डॉ.) डी.के. तांती (डीन, अधिविधि), प्रो. (डॉ.) राजीव वर्मा (डीन, छात्र कल्याण), प्रो. (डॉ.) उदय कुमार सिंह (प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग), डॉ. जीतू कुजूर (सह-प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग), डॉ. माया राजनारायण राय (सह-प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग), प्रो. रेखा झा (सह-प्राध्यापक, विद्युत अभियंत्रण विभाग), प्रो. प्रशान्त रंजन मालवीय (सहायक प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग), डॉ. अभिजीत आनंद (सहायक प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग), डॉ. कोमल कुमारी (सहायक प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग) एवं प्रो. इकबाल शेख (सहायक प्राध्यापक, असैनिक अभियंत्रण विभाग) सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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