यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाना गलत : माकपा
डीजे न्यूज, रांची: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लेन-देन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि डिजिटल इंडिया के नाम पर मोदी सरकार ने डिजिटल भुगतान और यूपीआई को एक निःशुल्क सार्वजनिक सुविधा के रूप में आक्रामक ढंग से बढ़ावा दिया। स्वयं प्रधानमंत्री ने बार-बार नागरिकों, छोटे व्यापारियों और व्यवसायों से नकद लेन-देन छोड़कर डिजिटल भुगतान अपनाने की अपील की। प्रधानमंत्री स्वयं भी यूपीआई को बढ़ावा देने वाली एक निजी भुगतान कंपनी के विज्ञापनों में दिखाई दिए। वास्तव में, नोटबंदी को उचित ठहराने के लिए भी डिजिटल भुगतान और यूपीआई के प्रचार को एक प्रमुख तर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
अब जबकि आम नागरिकों ने इसे भुगतान और लेन-देन का प्रमुख माध्यम बना लिया है, सरकार उसी सार्वजनिक अवसंरचना को राजस्व अर्जित करने का साधन बनाने के लिए उस पर लेन-देन शुल्क लगाने का प्रयास कर रही है। यह जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है, क्योंकि सरकार लगातार यह कहती रही है कि यूपीआई निःशुल्क बना रहेगा।
इस कदम को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। पिछले एक दशक में जनता पर बैंकिंग सेवाओं से जुड़े अनेक शुल्कों का लगातार बोझ बढ़ाया गया है—न्यूनतम शेष राशि न रखने पर जुर्माना, निर्धारित सीमा से अधिक एटीएम लेन-देन पर बढ़े हुए शुल्क, डेबिट कार्ड रखरखाव शुल्क, एसएमएस अलर्ट शुल्क आदि ने आवश्यक बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच को और महंगा बना दिया है।
सीपीआई (एम) ने इस प्रस्तावित कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है। यूपीआई को सभी के लिए सुलभ, निःशुल्क, सार्वभौमिक तथा सार्वजनिक जवाबदेही वाला डिजिटल भुगतान तंत्र बनाए रखा जाना चाहिए।