वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे आईआईटी (आईएसएम) के प्रशिक्षु, सीखा कचरे से संसाधन बनाने का तरीका

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे आईआईटी (आईएसएम) के प्रशिक्षु, सीखा कचरे से संसाधन बनाने का तरीका

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग (ईएसई) स्थित ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर की ओर से शुक्रवार को भेलाटांड़ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (जीएसडीपी) के तहत संचालित ‘वेस्ट ऑप्टिमाइजेशन प्रोफेशनल’ सर्टिफिकेट कोर्स के 20 प्रशिक्षुओं ने इसमें हिस्सा लिया। प्रशिक्षुओं ने जल शोधन की प्रक्रिया, उससे निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी हासिल की।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. जयदेव महतो मौजूद रहे। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पूर्व छात्र डॉ. महतो ने इसी संस्थान के ईएसई विभाग से पीएचडी की है। वर्तमान में वह गैर-सरकारी संगठन झारखंड फाउंडेशन केंद्र के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं।

स्लज और फिल्टर बैकवॉश के प्रबंधन की मिली जानकारी

भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को शुद्ध करने के विभिन्न चरणों का अवलोकन किया। इस क्रम में सेडिमेंटेशन प्रक्रिया से निकलने वाले स्लज (कीचड़) और फिल्टर बैकवॉश से उत्पन्न अवशेषों के सुरक्षित प्रबंधन पर विशेष चर्चा हुई। प्रशिक्षुओं को वेस्ट कैरेक्टराइजेशन, सुरक्षित हैंडलिंग, ट्रीटमेंट, रिसोर्स रिकवरी और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की प्रक्रियाओं के बारे में भी बताया गया।

उन्हें समझाया गया कि जल शोधन के दौरान निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मददगार है। इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से प्रशिक्षुओं को वास्तविक परिस्थितियों में वेस्ट मैनेजमेंट की चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है।

20 दिसंबर तक चलेगा तीन महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम

उल्लेखनीय है कि तीन महीने के जीएसडीपी सर्टिफिकेट कोर्स का उद्घाटन 22 सितंबर को हुआ था। यह कार्यक्रम 20 दिसंबर तक चलेगा। इसके तहत ठोस कचरा, प्लास्टिक, बायोमेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक और निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, रिसाइक्लिंग, सर्कुलर इकोनॉमी और वेस्ट ऑप्टिमाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में कुशल पेशेवर तैयार करना है। वहीं, ईआईएसीपी कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संबंधी जानकारी, जागरूकता, क्षमता निर्माण और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जाता है।

यह फील्ड विजिट पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के प्रति प्रशिक्षुओं की समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह केंद्र सरकार के मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) के उद्देश्यों के अनुरूप पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करने में भी सहायक है।

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