पीरटांड़ की धरती से सुदिव्य सोनू का रहा गहरा रिश्ता, विकास कार्यों में छोड़ी अपनी छाप
डीजे न्यूज, पीरटांड़ (गिरिडीह) : गिरिडीह विधायक सह झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन से गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर है। रविवार तड़के उनके निधन की खबर मिलते ही पीरटांड़ प्रखंड में भी शोक का माहौल छा गया। हृदयाघात के बाद गिरिडीह स्थित मर्सी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
सुदिव्य कुमार सोनू का पीरटांड़ से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा। राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर से ही उनका क्षेत्र में आना-जाना रहा और धीरे-धीरे यहां के लोगों से उनका व्यक्तिगत रिश्ता मजबूत होता गया। वे पीरटांड़ को केवल राजनीतिक क्षेत्र के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि लोगों के सुख-दुख में भी सक्रिय रूप से शामिल होते रहे।
विधानसभा चुनाव में पीरटांड़ ने दिया मजबूत साथ
गिरिडीह विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू की जीत में पीरटांड़ क्षेत्र की अहम भूमिका रही। हालिया विधानसभा चुनाव में पीरटांड़ क्षेत्र से उन्हें करीब 30 हजार मत प्राप्त हुए थे। क्षेत्र से मिले इस मजबूत जनसमर्थन ने उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनाव जीतने के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
गरीबों और जरूरतमंदों से रहा सीधा जुड़ाव
चुनाव जीतने से पहले भी सुदिव्य कुमार सोनू का पीरटांड़ के गरीब और आदिवासी परिवारों के बीच लगातार आना-जाना रहा। क्षेत्र के लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते थे और वे उनकी बात गंभीरता से सुनते थे। व्यक्तिगत स्तर पर सहयोग से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तक उन्होंने लोगों की मदद की।
मंत्री बनने के बाद भी पीरटांड़ से उनका जुड़ाव कायम रहा। उनके प्रयासों से क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया समेत कई विकास योजनाओं को स्वीकृति मिली और उन्हें गति दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
तीन बड़ी योजनाएं बनीं विकास की पहचान
पीरटांड़ के विकास से जुड़ी कई योजनाओं में तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाएं विशेष रूप से चर्चा में रहीं। उनके प्रयासों से मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना, जैव विविधता पार्क और चिड़ियाघर निर्माण जैसी योजनाओं को क्षेत्र में लाने की पहल हुई। इन योजनाओं को पीरटांड़ के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से पीरटांड़ ने ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया, जिसका क्षेत्र से राजनीतिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा। उनके निधन से राजनीतिक कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों में गहरा शोक है। क्षेत्र के लोगों के बीच उनके विकास कार्य और पीरटांड़ के प्रति उनका लगाव लंबे समय तक याद किया जाएगा।