पावरिंग द प्लैनेट, वन एक्शन एट अ टाइम: उत्साह और नई सोच के साथ मना वर्ल्ड अर्थ डे

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पावरिंग द प्लैनेट, वन एक्शन एट अ टाइम: उत्साह और नई सोच के साथ मना वर्ल्ड अर्थ डे

डीजे न्यूज, धनबाद: पावर इन पीपल, प्रॉमिस फॉर द प्लैनेट। इसी सोच के साथ “आवर पावर आवर प्लानेट” थीम को आगे बढ़ाते हुए आइआइटी-आइएसएम धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियंत्रण विभाग के EIACP प्रोग्राम सेंटर ने Insearch NGO, धनबाद के सहयोग से बुधवार को संस्थान के i2h बिल्डिंग में वर्ल्ड अर्थ डे का आयोजन किया।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यावरण बचाने के लिए सबकी भागीदारी जरूरी है। साथ ही यह भी बताया गया कि कैसे व्यक्ति, संस्थान और तकनीक मिलकर एक बेहतर और टिकाऊ भविष्य बना सकते हैं। कार्यक्रम में सस्टेनेबल लाइफस्टाइल, नई तकनीकों और युवाओं की भागीदारी पर खास फोकस रहा।
मुख्य अतिथि आदर्श अग्रवाल, डायरेक्टर, ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट (माइंस), C&AG, कोलकाता ने कहा कि पर्यावरण प्रबंधन में जवाबदेही बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को नियमों का पालन करते हुए सस्टेनेबल प्रैक्टिस को बढ़ावा देना चाहिए।

गेस्ट ऑफ ऑनर प्रो. प्रभाकर सिंह, फाउंडर एवं चांसलर, सोना देवी यूनिवर्सिटी, घाटशिला ने कहा कि पर्यावरण शिक्षा और समाज की भागीदारी के बिना लंबे समय तक बदलाव संभव नहीं है।
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार के संरक्षण में हुआ, जिनके सहयोग से संस्थान में पर्यावरण से जुड़े प्रयास लगातार मजबूत हो रहे हैं।

EIACP सेंटर के कोऑर्डिनेटर प्रो. आलोक सिन्हा ने स्वागत करते हुए सेंटर की गतिविधियों के बारे में बताया और कहा कि संस्थान जागरूकता और क्षमता निर्माण के जरिए सतत विकास की दिशा में काम कर रहा है। वहीं को-कोऑर्डिनेटर प्रो. सुरेश पांडियन ने कहा कि पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए समाज की भागीदारी और स्किल डेवलपमेंट जरूरी है।

कार्यक्रम का खास आकर्षण पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का शोकेस रहा, जिसमें छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पर्यावरण विषय पर नए और क्रिएटिव पोस्टर तैयार किए। इससे तकनीक और जागरूकता का अच्छा मेल देखने को मिला।
सोना देवी यूनिवर्सिटी, घाटशिला के छात्रों ने भी विभाग और EIACP सेंटर का दौरा किया, जहां उन्हें चल रहे रिसर्च और अन्य गतिविधियों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों की अच्छी भागीदारी रही। अंत में सभी ने मिलकर पर्यावरण को बचाने और स्वच्छ-हरित भविष्य के लिए काम करने का संकल्प लिया।

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