झरिया में माकपा ने मनाई लेनिन की जयंती, शिवबालक पासवान बोले- पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई में लेनिनवाद ही रास्ता

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झरिया में माकपा ने मनाई लेनिन की जयंती, शिवबालक पासवान बोले- पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई में लेनिनवाद ही रास्ता

डीजे न्यूज,

तिसरा, धनबाद : महान क्रांतिकारी नायक और आधुनिक युग के प्रखर विचारक व्लादिमीर लेनिन की 156वीं जयंती भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) झरिया लोकल कमिटी के फैसले के अनुसार लोदना दुर्गा मंदिर क्लब में मनाई गई।

कार्यक्रम की शुरुआत _“शोषण मुक्त समाज के निर्माणकर्ता, कामरेड लेनिन को लाल सलाम। मार्क्सवाद, लेनिनवाद, जिंदाबाद। कामरेड लेनिन को लाल सलाम”_ के नारों के साथ हुई। सबसे पहले CPI(M) राज्य कमिटी सचिव मण्डल सदस्य कामरेड शिव बालक पासवान ने उनके तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उपस्थित साथियों ने बारी-बारी से कामरेड लेनिन को श्रद्धांजलि दी और उनके याद में विचार गोष्ठी की गई।

संगोष्ठी का उद्घाटन झरिया लोकल कमिटी के सचिव भगवान दास पासवान ने किया। पार्टी शिक्षक जलेश के राज्य कार्यकारिणी सदस्य कामरेड नारायण चक्रवर्ती ने कहा कि लेनिन के मुख्य विचार पूंजीवाद से संक्रमण, साम्यवाद के लिए लोकतंत्र से शोषकों को बाहर करना, शांति, भूमि और रोटी, प्रथम विश्व युद्ध से थके रूस के लिए उनका नारा और पार्टी संगठन: पेशेवर क्रांतिकारियों का एक केंद्रीयकृत समूह हैं। उन्होंने कहा कि हमें उनके विचारों को समझना होगा और इसी आधार पर आगे बढ़ना होगा, तभी हम पूंजीवाद को हरा सकते हैं और सर्वहारा वर्ग कायम कर सकते हैं।

पार्टी राज्य कमिटी सचिव मंडल के सदस्य कामरेड शिव बालक पासवान ने कहा कि कामरेड लेनिन का जन्म 1870 में हुआ और उनकी मृत्यु 1924 में हुई। उनका विचार मार्क्सवाद-लेनिनवाद का आधार है, जो सर्वहारा क्रांति, कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व और साम्राज्यवाद के सिद्धांत पर आधारित है। वे इन सिद्धांतों को रूसी परिस्थितियों में लागू करने के प्रबल समर्थक थे। कामरेड लेनिन ने 1902 में तर्क दिया की मजदूर वर्ग स्वतः स्फूर्त रूप से क्रांतिकारी नहीं बन सकता, इसके लिए एक अनुशासित, शिक्षित और केंद्रीय पार्टी के नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने साम्राज्यवाद को पूंजीवाद का अंतिम चरण बताया जहां एकाधिकार पूंजी वैश्विक संघर्ष और युद्ध को जन्म देती है।

आगे वक्ताओं में कामरेड रामवृक्ष धारी, विनोद पासवान, नौशाद अंसारी, नीरज पासवान, शंकर पासवान, आनंदी पासवान, हीरा पासवान, भोला माली, अब्दुल समद, अमरजीत पासवान, इंद्रजीत पासवान, फरीद अंसारी, प्रजा पासवान, हेमंत बावरी आदि शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नौशाद अंसारी ने की।

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