कोक ओवन के दूषित अपशिष्ट जल के शोधन की नई तकनीक पर मिला पेटेंट
डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के शोधकर्ताओं ने औद्योगिक प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष (एचओडी) प्रो. आलोक सिन्हा और उनके पीएचडी शोधार्थी डॉ. धर्मेंद्र सिंह केन को कोक ओवन उद्योगों से निकलने वाले अत्यधिक प्रदूषित अपशिष्ट जल के प्रभावी शोधन की एक नई तकनीक विकसित करने के लिए भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है।
“ए हाइब्रिड हेटेरोजीनियस 3डी इलेक्ट्रो-फेंटन बेस्ड इलेक्ट्रो-ऑक्सीडेशन सिस्टम सपोर्टेड विद कैटेलिटिक पार्टिकल इलेक्ट्रोड्स (nZVI/GAC) फॉर ट्रीटमेंट ऑफ कोक-ओवन वेस्टवॉटर” शीर्षक वाले इस आविष्कार का पेटेंट 22 जून 2026 को प्रदान किया गया। इसके लिए 6 मार्च 2025 को आवेदन किया गया था। यह पेटेंट 20 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
सरल शब्दों में कहें तो यह तकनीक कोक ओवन उद्योगों से निकलने वाले ऐसे गंदे पानी को साफ करने में मदद करेगी, जिसमें कई जहरीले रसायन मौजूद होते हैं और जिन्हें पारंपरिक तकनीकों से हटाना आसान नहीं होता। नई प्रणाली में बिजली और विशेष रूप से तैयार किए गए कैटेलिटिक पार्टिकल्स का उपयोग किया जाता है, जो इन हानिकारक रसायनों को कम नुकसानदेह पदार्थों में बदल देते हैं। इससे उद्योगों से निकलने वाला पानी पर्यावरण में छोड़े जाने से पहले अधिक स्वच्छ हो सकेगा। यह तकनीक नदियों, भूजल और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
इस उपलब्धि पर प्रो. आलोक सिन्हा ने कहा, “हमारा प्रयास ऐसी तकनीक विकसित करना है जो समाज और उद्योग, दोनों के लिए उपयोगी हो। यह तकनीक उद्योगों को अपशिष्ट जल का बेहतर शोधन करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करने में मदद करेगी।”
प्रो. आलोक सिन्हा ने पर्यावरण अभियंत्रण में आईआईटी कानपुर से पीएचडी की है। उनका शोध जल एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन, भूजल प्रदूषण नियंत्रण, नैनो-टेक्नोलॉजी तथा एडवांस्ड ऑक्सीडेशन प्रोसेसेज पर केंद्रित है। इससे पहले भी उन्हें अपशिष्ट जल शोधन तकनीक पर एक पेटेंट मिल चुका है। उनके 60 से अधिक शोधपत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा उनके निर्देशन में 13 पीएचडी शोधार्थी अपनी उपाधि पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई शोध एवं परामर्श परियोजनाओं का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।