इलाज के दौरान घायल बस यात्री की मौत, मुआवजे के लिए बस मालिक के दरवाजे पर शव रखकर प्रदर्शन
मुआवजा और प्राथमिकी की मांग पर अड़े ग्रामीण, बिरनी में देर शाम तक बना रहा तनावपूर्ण माहौल
डीजे न्यूज, बिरनी (गिरिडीह): सड़क हादसे में घायल 48 वर्षीय बसंत महतो की इलाज के दौरान मौत हो गई। रविवार दोपहर रांची के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। इसके बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव लेकर बिरनी थाना क्षेत्र के पलौंजिया स्थित प्रिंस परिवर्तन बस के मालिक नीलू सिन्हा के घर पहुंचे और मुख्य दरवाजे पर शव रखकर मुआवजे तथा प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने लगे। रविवार शाम करीब 6:30 बजे तक शव वहीं रखा हुआ था।
**15 अक्टूबर को डुमरी बाइपास के पास हुआ था हादसा**
मिली जानकारी के अनुसार, पुरनानगर निवासी बसंत महतो 15 अक्टूबर 2026 को प्रिंस परिवर्तन बस से कोलकाता से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान डुमरी बाइपास के पास अहले सुबह करीब तीन बजे एक अज्ञात वाहन ने बस को पीछे से टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। हादसे में बसंत महतो घायल हो गए थे। परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां रविवार दोपहर 12 बजे उनकी मौत हो गई।
**इलाज में सहयोग नहीं करने का लगाया आरोप**
मृतक के परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद बस मालिक ने घटना को छिपाने का प्रयास किया और इलाज के दौरान किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी। इसी बात को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब तक उचित मुआवजे और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे शव को वहां से नहीं हटाएंगे।
बस मालिक का घर बिरनी थाना से करीब 300 मीटर की दूरी पर पलौंजिया में स्थित है। घटना की जानकारी फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
**जनप्रतिनिधियों ने शुरू की समझौते की पहल**
मामले की जानकारी मिलने पर प्रमुख रामु बैठा, जेएलकेएम के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सूरज कुमार साहू, बासुदेव वर्मा समेत कई गणमान्य लोग मौके पर पहुंचे। वे मृतक के परिजनों को समझाने और बस मालिक से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास करने लगे।
**थाना प्रभारी ने संभाला मोर्चा**
घटना की सूचना मिलते ही बिरनी थाना प्रभारी आकाश भारद्वाज भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए जनप्रतिनिधियों, गणमान्य लोगों और मृतक के परिजनों के साथ बातचीत की जा रही थी।
समाचार लिखे जाने तक बसंत महतो का शव बस मालिक के घर के मुख्य दरवाजे पर रखा हुआ था और मुआवजे तथा प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ था।