मधुबन में जुटेंगे देश-विदेश के सरना धर्मावलंबी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को महासम्मेलन का न्योता
4 और 5 नवंबर को मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन, फागू बेसरा के नेतृत्व में संथाल समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
डीजे न्यूज, पीरटांड़ (गिरिडीह) : मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आमंत्रित किया गया है। रविवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त फागू बेसरा के नेतृत्व में संथाल समाज के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें 4 और 5 नवंबर को मरांग बुरु, मधुबन (पीरटांड़) में आयोजित होने वाले महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री को 22 से 24 नवंबर तक बोकारो जिले के ललपनिया स्थित टीटीपीएस में सोहराय कुनामी (कार्तिक पूर्णिमा) के अवसर पर आयोजित होने वाले 26वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सामाजिक एवं सरना धर्म सम्मेलन में भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया।
**आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर होगा जोर**
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि दोनों महासम्मेलनों में देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी सरना धर्मावलंबियों के शामिल होने की उम्मीद है। इन आयोजनों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और धार्मिक आस्था के संरक्षण के साथ संथाल समाज की एकजुटता को मजबूत करने पर चर्चा होगी। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों आयोजनों की तैयारियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए दोनों महासम्मेलनों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और जन-आस्था के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। अपनी पहचान और अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
**फागू बेसरा के नेतृत्व में पहुंचा प्रतिनिधिमंडल**
प्रतिनिधिमंडल में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त एवं मरांग बुरु बचाओ मोर्चा के अध्यक्ष फागू बेसरा के अलावा हीरालाल मांझी, सोमई टुडू, महावीर मुर्मू, विष्णु किस्कू, दिलीप मुर्मू, सुशांत प्रसाद सोरेन, सुरेश हेंब्रम, सुधीर बास्के, बबली सोरेन, शनिचर बेसरा, लादु मांझी, डॉ. डुमनी मयी मुर्मू और सोनाराम मांझी सहित संथाल समाज के कई गणमान्य लोग शामिल थे।
दोनों महासम्मेलनों को लेकर संथाल समाज में तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि इन आयोजनों के जरिए आदिवासी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को नई मजबूती मिलेगी।