एसी कोच की सफेद चादरों से यात्रियों में डर और असहजता, रेलवे बोर्ड ने लिया संज्ञान

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एसी कोच की सफेद चादरों से यात्रियों में डर और असहजता, रेलवे बोर्ड ने लिया संज्ञान

रेलवे में बदल सकती हैं सफेद चादरें, यात्रियों के मानसिक आराम को लेकर उठी मांग

डीजे न्यूज, गिरिडीह : भारतीय रेलवे के वातानुकूलित (AC)डिब्बों में यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सफेद चादरों को लेकर उठे मानसिक असहजता और भय के मुद्दे पर अब रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल द्वारा इस संबंध में रेलवे बोर्ड को विस्तृत पत्र भेजकर यात्रियों की मनोवैज्ञानिक परेशानियों और यात्रा अनुभव से जुड़े अहम पहलुओं को उठाया गया था।

अपने पत्र में खंडेलवाल ने कहा था कि रात्रिकालीन यात्रा के दौरान मंद रोशनी में विभिन्न बर्थों पर फैली सफेद चादरें कई यात्रियों, खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भयावह एवं असहज माहौल पैदा करती हैं। कई यात्रियों ने यह महसूस किया है कि ऐसा दृश्य अस्पताल या किसी डरावने वातावरण जैसा प्रतीत होता है, जिससे यात्रा का आरामदायक अनुभव प्रभावित होता है।

इस जनहित से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे board ने आवश्यक कार्रवाई के लिए इसे कार्यकारी निदेशक रत्नेश कुमार झा के पास अग्रसारित कर दिया है। इसे यात्रियों की भावनाओं और मानसिक आराम के प्रति रेलवे की संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है।

सुनील कुमार खंडेलवाल ने सुझाव दिया है कि सफेद चादरों के स्थान पर हल्के नीले, क्रीम, हल्के ग्रे अथवा अन्य सौम्य और आरामदायक रंगों की चादरों के उपयोग पर विचार किया जाए, ताकि यात्रियों को मानसिक रूप से अधिक सहज और सुरक्षित महसूस हो सके। इसके साथ ही उन्होंने यात्रियों की राय जानने के लिए रेलवे द्वारा सर्वे और फीडबैक व्यवस्था शुरू करने का भी सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और दैनिक जीवन से जुड़ी व्यवस्था है। ऐसे में यात्रियों के मानसिक अनुभव और छोटे-छोटे आरामदायक पहलुओं पर ध्यान देना रेलवे की सकारात्मक और आधुनिक सोच को और मजबूत करेगा।

इस पहल को लेकर सोशल मीडिया और आम यात्रियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। बड़ी संख्या में लोग इसे यात्रियों की सुविधा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मान रहे हैं।

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