एनडीआरएफ की स्थायी तैनाती का मामला विधानसभा में उठा
डीजे न्यूज, धनबाद: झरिया विधानसभा क्षेत्र समेत धनबाद जिले में दामोदर नदी, जलभराव वाले क्षेत्र और परित्यक्त कोयला खदानों में जमा पानी के कारण उत्पन्न होने वाली आकस्मिक घटनाओं से निपटने के लिए स्थानीय गोताखोरों के स्थायी समायोजन और धनबाद में एनडीआरएफ की स्थायी व्यवस्था की मांग झरिया विधायक रागिनी सिंह ने विधानसभा के मानसून सत्र में उठाई। विधायक के तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की है।
विधायक रागिनी सिंह ने सरकार से पूछा कि क्या यह सही है कि झरिया विधानसभा क्षेत्र सहित धनबाद जिला कोयला उत्खनन वाला क्षेत्र है, जहां दामोदर नदी तथा खाली पड़ी कोयला खदानों में जल संग्रह रहता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आपात स्थिति में स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जाती है, लेकिन उनका स्थायी समायोजन नहीं हो पाया है। साथ ही उन्होंने धनबाद जिला मुख्यालय में एनडीआरएफ का स्थायी कार्यालय नहीं होने से आकस्मिक घटनाओं से निपटने में होने वाली कठिनाइयों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
सरकार ने तीन बिंदुओं पर स्थिति स्वीकार की।
सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले प्रश्न का उत्तर स्वीकारात्मक, जबकि स्थानीय गोताखोरों की उपलब्धता और एनडीआरएफ कार्यालय से संबंधित प्रश्नों पर आंशिक स्वीकारात्मक जवाब दिया है।
सरकार ने बताया कि आपदा प्रबंधन प्रभाग स्तर पर धनबाद सहित अन्य जिलों के दो-दो गोताखोरों को मिलाकर कुल 47 गोताखोरों को Deep Diving का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन गोताखोरों का बीमा भी कराया जा चुका है। प्रशिक्षण के बाद अपेक्षित उपकरणों से लैस प्रशिक्षित गोताखोरों को घटना की प्रकृति के अनुरूप 10 हजार रुपये तक की निर्धारित प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि धनबाद जिले में NDRF की स्थायी प्रतिनियुक्ति के संबंध में सरकार के समक्ष फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
रागिनी सिंह ने कहा कि धनबाद और विशेषकर झरिया की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य जिलों से अलग हैं। यहां बड़े पैमाने पर कोयला खनन, भूमिगत खदानें, परित्यक्त खदानों में जमा पानी और दामोदर नदी जैसे जलस्रोत मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी आकस्मिक घटना के दौरान तत्काल प्रशिक्षित बचाव दल की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने के बाद बाहर से राहत दल के पहुंचने का इंतजार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। स्थानीय प्रशिक्षित गोताखोरों को स्थायी व्यवस्था से जोड़ने और धनबाद में NDRF की स्थायी इकाई स्थापित करने से बचाव कार्य में समय की बचत होगी और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।