धागों से बुनेगी नई जिंदगी, करघे पर साड़ी बनाकर आत्मनिर्भर बनेंगी 30 महिलाएं
डीजे न्यूज, गिरिडीह : अब गांव की महिलाओं के हाथों में सिर्फ घरेलू कामकाज नहीं, बल्कि हुनर और रोजगार का नया अवसर भी होगा। जमुआ प्रखंड के बेरहाबाद गांव में बुधवार को ‘स्वावलंबी साड़ी संगम’ परियोजना के तहत हस्तकरघा साड़ी निर्माण प्रशिक्षण के दूसरे बैच का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण में 30 ग्रामीण महिलाओं को साड़ी निर्माण का हुनर सिखाया जाएगा, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद स्वयं साड़ी तैयार कर स्वरोजगार से जुड़ सकें।
नाबार्ड के सौजन्य से आइडिया- इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट, एम्पावरमेंट एंड अवेयरनेस, गिरिडीह द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण 30 सितंबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा। कार्यक्रम का उद्घाटन जेएसएलपीएस गिरिडीह के डीपीएम जेवियर एक्का, नाबार्ड के डीडीएम हरिहरन सीवी, जेएसएलपीएस जमुआ के बीपीएम प्रमोद झा, बेरहाबाद पंचायत की मुखिया सोनी देवी, आइडिया की प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर खुशी शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अनवर हादी ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर जेएसएलपीएस के डीपीएम जेवियर एक्का ने महिलाओं को प्रशिक्षण का गंभीरता से लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पूरी लगन और मेहनत से सीखा गया हुनर भविष्य में घर बैठे आमदनी का जरिया बन सकता है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सबसे पहले अपने लिए एक साड़ी तैयार करें, उसे पहनकर उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी मार्केटिंग का अनुभव हासिल करें।
नाबार्ड के डीडीएम हरिहरन सीवी ने कहा कि हस्तकरघा साड़ी निर्माण का प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकता है। महिलाएं इस हुनर को आजीविका से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
जेएसएलपीएस जमुआ के बीपीएम प्रमोद झा ने कहा कि ‘स्वावलंबी साड़ी संगम’ जैसी पहल ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कौशल से जोड़ते हुए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से नियमित रूप से प्रशिक्षण लेने और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया।
बेरहाबाद पंचायत की मुखिया सोनी देवी ने कहा कि साड़ी निर्माण का प्रशिक्षण पंचायत की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगा। उन्होंने महिलाओं को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
भागलपुर के मास्टर ट्रेनर देंगे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दूसरे बैच में 30 महिलाओं को 20 दिनों तक साड़ी निर्माण की तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। बिहार के भागलपुर से आए मास्टर ट्रेनर विश्वनाथ शाह महिलाओं को हस्तकरघा संचालन, साड़ी निर्माण और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने की बारीकियां सिखाएंगे। उद्देश्य है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं स्वयं साड़ी निर्माण कर आय का स्थायी साधन विकसित कर सकें।
आइडिया की प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर खुशी शर्मा ने बताया कि ‘स्वावलंबी साड़ी संगम’ परियोजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
कार्यक्रम में सीआरपी हसीना खातून, मुंद्रिका देवी, कौशल्या देवी, सुनीता देवी, बबीता देवी, कलावती देवी, सुमित्रा देवी, हेमंती देवी, सोनी देवी, रिंकू देवी, लक्ष्मी देवी, अनिता देवी, जयंती देवी, रानी देवी, पिंकी देवी, गुड़िया देवी, रेखा देवी सहित कुल 30 प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहीं।