अलकडीहा शिव मंदिर पातालेश्वर धाम में तीन सौ साल पुरानी चड़क पूजा शुरू, 40 फीट ऊंचे बांस पर भक्तों ने दिखाए करतब
डीजे न्यूज, तिसरा, धनबाद : झरिया के तीसरा क्षेत्र के अलकडीहा शिव मंदिर पातालेश्वर धाम में रविवार को धूमधाम के साथ चड़क पूजा शुरू हुई। चड़क पूजा को लेकर अहले सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। शिव भक्तों ने मुकुंदा तालाब में स्नान कर दंडवत देते हुए मंदिर परिसर पहुंचे। मंदिर के पूजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना कराई। देर रात गाजन का कार्यक्रम हुआ।
बता दें कि यह 300 से अधिक साल पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त खुद को भगवान शिव को समर्पित करते हैं और जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है, वे अपने शरीर पर लोहे की कील चुभोकर भगवान शिव के प्रति आस्था प्रगट करते हैं।
वहीं अलकडीहा मंदिर में पुजारी के द्वारा विधिवत पूजा के बाद मंगलवार को भक्त अपने शरीर पर कील चुभाकर रस्सी के सहारे 40 फीट ऊंचे बांस (चड़क पेड़) पर घूमकर करतब दिखाए। इस दौरान पूरा इलाका ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। लगभग 100 से अधिक लोगों को भोक्ता घुमाया गया।
अलकडीहा शिव मंदिर में चड़क पूजा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में मेले और गाजन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है, जिसमें आसपास और दूर दराज से चड़क पूजा और मेला देखने के लिए लोग हजारों की संख्या में पहुंचे हैं।
मंदिर के पुजारी संदीप शास्त्री बताते हैं कि यहां प्राचीन परंपराओं के अनुसार चड़क पूजा आज भी विधि-विधान से की जाती है, जो शिव के हठयोग से जुड़ी मानी जाती है। इस पूजा में लगभग 7 फीट ऊंचे स्तंभ पर भक्त अपने शरीर में धारदार लोहे की कीलनुमा वस्तु चुभाकर अपनी मंगल कामना हेतु आस्था का विशेष प्रदर्शन करते हैं।
पुजारी राहुल मुखर्जी रुद्र ने कहा कि अलकडीहा मंदिर चड़क पूजा में केवल झारखंड ही नहीं, पश्चिम बंगाल से भी लोग मौजूद होते हैं। भीड़ से यह जाहिर होता है कि बाबा के कृपा से हर साल सबकी मनोकामना पूर्ण हो रही है, इसलिए लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज चड़क घूमेगा और कल मां काली की पूजा करके समापन होगा।
अलकडीहा बूढ़ा बाबा के प्रति यहां के लोगों की गहरी आस्था है। माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इच्छा पूर्ण होने के बाद भक्त बड़े धूमधाम से वापस मंदिर पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। 300 साल पुराने इस बूढ़ा बाबा शिव मंदिर की कहानी सिर्फ एक धार्मिक स्थल की नहीं, बल्कि आस्था, चमत्कार और परंपराओं की ऐसी अमिट गाथा है, जिसे आज भी लोग बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।