मजदूरों के संसद मार्च में झारखंड से तीन हजार कामगार हिस्सा लेंगें: सीटू
सीटू राज्य कमिटी की दो दिवसीय बैठक संपन्न
डीजे न्यूज, रांची: रांची में आयोजित सीटू राज्य कमिटी की दो दिवसीय बैठक का समापन सोमवार को हुआ। बैठक में चार लेबर कोड लागू होने के बाद श्रमिकों पर मालिकों के बढ़ते हमले के खिलाफ, न्यूनतम वेतन में बढोत्तरी सुनिश्चित करने , असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की मांगों को लेकर एक व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
पूर्व सांसद और सीटू के उपाध्यक्ष तपन सेन ने कहा कि पूरी दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्था
का संकट गहरा होता जा रहा है। भारत भी इस संकट से बुरी तरह ग्रसित है। यहां का शासक वर्ग इस संकट का बोझ देश के मेहनतकशों पर डाल रहा है। इस बोझ के खिलाफ जब मेहनतकश प्रतिरोध खड़ा कर रहे है, तो इससे निपटने के लिए यहाँ की सरकार आक्रामक रवैया अपना रही है। मजदूरों को गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड, स्थाई कामगारों की जगह ठेका प्रथा जिसे अब आउटसोर्सिंग में बदल दिया गया है। इसे रोकने के लिए लेबर कोड में प्रधान नियोक्ता की भूमिका को ही खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण और ठेका प्रथा के अलावा काम के घंटे बढने और बढ़ती महंगाई के चलते कामगारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कामगारों के आक्रोश को संगठित दिशा दिए जाने पर बल दिया।
बैठक में राज्य महासचिव विश्वजीत देब ने कार्य रिपोर्ट पेश की। कार्य रिपोर्ट में झारखंड में सीटू का दायरा अन्य लक्षित सेक्टरों में बढाने, असंगठित क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं को उठाने तथा राज्य के श्रम विभाग की लाल फीताशाही के खिलाफ अभियान चलाए जाने का उल्लेख किया गया। बैठक की अध्यक्षता सीटू के कार्यकारी अध्यक्ष भवन सिंह ने की। बैठक में कोयला, इस्पात, बिजली, बाक्साईट, संड़क परिवहन और निर्माण सेक्टर के अलावा परियोजना कर्मियों – आंगनबाड़ी, मिड – डे – मिल और सहिया युनियन से जुड़े राज्य कमिटी सदस्यों ने हिस्सा लिया।