मां कामेश्वरी धाम पहुंचे सांसद दुलू महतो, बीसीसीएल प्रबंधन से की वार्ता

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मां कामेश्वरी धाम पहुंचे सांसद दुलू महतो, बीसीसीएल प्रबंधन से की वार्ता

मंदिर पर मंडरा रहे खतरे के बीच सुरक्षित विस्थापन की मांग तेज

डीजे न्यूज तिसरा(धनबाद) : गोल्डन पहाड़ी, नॉर्थ तीसरा/साउथ तीसरा परियोजना के विस्तारीकरण के तहत ओबी डंप माँ कामेश्वरी धाम मंदिर के अत्यंत निकट पहुंच जाने से मंदिर की सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की आस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं, ग्रामीणों एवं सिद्ध गुरु चैतन्य शक्ति पीठ परिवार में गहरी चिंता व्याप्त है।

इस गंभीर विषय को लेकर आज धनबाद के माननीय सांसद श्री दुलू महतो मां कामेश्वरी धाम पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति एवं स्थानीय लोगों ने उन्हें मंदिर के समक्ष उत्पन्न खतरे और सुरक्षित विस्थापन की मांग से अवगत कराया। इस दौरान सांसद महतो ने बीसीसीएल प्रबंधन से दूरभाष पर वार्ता कर मंदिर के विस्थापन एवं पुनर्स्थापन के संबंध में चर्चा की। प्रबंधन द्वारा इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई हेतु कुछ समय की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि परियोजना क्षेत्र के आसपास स्थित ग्रामवासियों, कॉलोनी एवं मुहल्ला निवासियों का विस्थापन वर्षों पूर्व किया जा चुका है, किंतु आज तक माँ कामेश्वरी धाम मंदिर का विस्थापन एवं पुनर्स्थापन नहीं किया गया है। लगातार बढ़ते खनन कार्य एवं ओबी डंप के मंदिर के समीप पहुंचने से मंदिर की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

माँ कामेश्वरी धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था एवं श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना, हवन, भंडारा तथा विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करना परियोजना प्रबंधन एवं प्रशासन की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है। सिद्ध गुरु चैतन्य शक्ति पीठ परिवार ने जिला प्रशासन, बीसीसीएल प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि माँ कामेश्वरी धाम मंदिर के सुरक्षित विस्थापन एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अविलंब प्रारंभ की जाए तथा मंदिर परिसर एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं।

यदि शीघ्र ही उचित एवं ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र के श्रद्धालु एवं आमजन अपने धार्मिक अधिकारों एवं आस्था की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन एवं प्रशासन की होगी।

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