24 घंटे बाद भी न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि पहुंचे दलुआडी
खाट पर जिंदगी, कागजों में विकास
सड़क नहीं, पुल नहीं… पारसनाथ पहाड़ की तराई में व्यवस्था बेदम
डीजे न्यूज, पीरटांड़ (गिरिडीह) : पारसनाथ की तराई में बसे संथाल बहुल गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सड़क, पुल, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और आवास जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। हालत यह है कि गर्भवती महिलाओं और मरीजों को आज भी खाट पर लादकर कई किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
इसी कड़ी में बुधवार को मधुबन पंचायत अंतर्गत दलुआडीह गांव की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों ने खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर दूर पिपराडीह तक पहुंचाया। बताया गया कि गांव तक तो दूर पंचायत क्षेत्र तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकी। खाट पर ले जाने के क्रम में रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। बाद में मुख्य सड़क से निजी वाहन से उसे पीरटांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। महिला सुनीता का इलाज फिलहाल सदर अस्पताल में चल रहा है। इस घटना के 24 घंटे बाद भी न तो प्रशासन का कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि इस गांव की सुध लेने पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। वर्षों से लोग मरीजों को खाट पर ढोकर सड़क तक पहुंचाने को विवश हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।
गुरुवार को देवभूमि झारखंड न्यूज की टीम गांव पहुंची तो ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोगों ने सड़क, पुल, पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सुविधा की मांग को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीण मखोनी देवी, पूरन मुर्मू, बैदा मुर्मू, हेमलाल मुर्मू और मुंशी हांसदा समेत अन्य लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक मरीज को खाट पर ले जाना पड़ा था। किसी तरह उसकी जान बच पाई थी। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी लोग नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। चापाकल खराब पड़ा है और अबुआ आवास योजना का लाभ भी अधिकांश जरूरतमंदों को नहीं मिल पाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि पिपराडीह तक सड़क बनी है, लेकिन वहां से पहाड़ की ओर जाने वाले गांवों तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। नदी पर पुल नहीं होने और सड़क नहीं बनने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं गांव के स्कूल की छत भी गिरने लगी है, लेकिन इस ओर भी प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि चार जून तक गांव की समस्याओं पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो लोगों का आक्रोश और बढ़ेगा तथा आंदोलन तेज किया जाएगा।