बकरीद को लेकर प्रशासन के आग्रह पर बालमुकुंद फैक्ट्री में माले का धरना स्थगित
स्थगित मतलब बंद नहीं, पांच जून को होगा बड़ा फैसला : अशोक पासवान
भाकपा माले नेताओं ने फैक्ट्री प्रबंधन का साथ देने का आरोप सांसद-विधायक पर लगाया, ताकत दिखाने का ऐलान
डीजे न्यूज, गिरिडीह : बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने 13 मई से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बकरीद पर्व को ध्यान में रखकर कुछ दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। 27 मई को धरना स्थल पर असंगठित मजदूर मोर्चा के महासचिव निताई महतो, भाकपा माले के जिला सचिव अशोक पासवान, किसान नेता पूरन महतो, नगर सचिव राजेश सिन्हा, वरिष्ठ नेता कन्हाई पांडेय की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
प्रशासन के साथ समझौता
मंगलवार की रात में अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और मुफ्फसिल थाना प्रभारी धरना स्थल पहुंचे। बकरीद पर्व में धरना स्थगित करने की बात कही। माले के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से राय लेकर पर्व को प्राथमिकता देते हुए लिखित समझौता पत्र बनाया गया। तय हुआ कि कुछ दिन बाद हजारों की संख्या में फिर गेट पर जुटेंगे। अभी पर्व का सम्मान करते हैं, इस कारण धरना स्थगित रहेगा।
नेताओं की चेतावनी
निताई महतो, महासचिव असंगठित मजदूर मोर्चा : विधायक, सांसद, मंत्री सभी पूंजीपतियों के साथ हैं। मजदूर विरोधी हैं। प्रशासन पर दबाव देने वाले लोग हैं। जल्द गली-मुहल्ले में माइक से पर्दाफाश करेंगे। स्थगित मतलब बंद नहीं होता। पांच जून को बड़ी बैठक कर माले जिला कमिटी और मोर्चा के साथियों के साथ बड़ा निर्णय लेंगे। दस दिनों के अंदर हजारों की संख्या में सड़कों पर खड़े मिलेंगे। तिवारी के सताए लोगों में आक्रोश है।
अशोक पासवान, जिला सचिव माले : फिलहाल पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन को राहत देते हैं। हमारी मांग जेनविन है, जायज है। 10 दिन के अंदर बड़े आंदोलन की तरफ जाएंगे। चिंता मत करे प्रशासन, इसी झारखंड-गिरिडीह में मात देंगे। लोकतांत्रिक जनांदोलन रोकना गैर-कानूनी है। इस बार अफसरों पर भी कानून का गाज गिराएंगे।
पूरन महतो, किसान नेता : प्रशासन ने कहा बकरीद तक ब्रेक लीजिए। सभी प्रखंडों के समर्थकों ने कहा बात सच है। जल्द आगे के आंदोलन पर चर्चा कर बालमुकुंद के सामने हजारों की संख्या में फिर लड़ेंगे।
असंगठित मजदूर मोर्चा के नेता कन्हाई पांडेय : स्थानीय नेता दे रहे है कंपनी का साथ, जल्द भंडाफोड़ करेंगे।
माले नेता राजेश सिन्हा : फैक्ट्री में स्थानीय मजदूरों की संख्या 75% नहीं है। राज्य सरकार के नेता, मंत्री इस पर आवाज नहीं उठाते। सिर्फ नियम बनाते हैं। कंपनी राज के साथ खड़े मिलते है सांसद और विधायक।
धरना स्थगित होते ही प्रबंधन ने निकाले 16 कर्मी
धरना स्थगित होते ही 27 मई को परशुराम तिवारी ने फिर से 16 कर्मियों को फैक्ट्री से निकाल दिया। मुकेश राय, चंद्रदेव राय, मनीष राय, मंटू राय, विकास राय, टुनटुन राय, मेघलाल राय, कर्मा राय आदि को हटाया गया। इसकी जानकारी एसडीओ, एसडीपीओ, थाना प्रभारी और सीओ को वॉट्सएप से दे दी गई है।
धरने का कारण
बिना नोटिस परशुराम तिवारी द्वारा मजदूरों को हटाना। लगातार लिखित शिकायत के बाद भी श्रम अधीक्षक ने ध्यान नहीं दिया। 13 मई से धरना जारी था। 26 मई को गेट जाम की पूर्व सूचना पर महिला-पुरुष बैठे। प्रशासन ने 3-4 घंटे का समय दिया, किंतु तिवारी झांसा देकर भाग निकल गए।
कंपनी के एजेंट नेता सक्रिय
धरना स्थल पर नेताओं ने पैरवी करने वालों के खिलाफ नारे लगाए। आरोप है कि कंपनी के एजेंट बनकर कुछ नेताओं ने जिला प्रशासन पर धरना हटाने का दबाव बनाया। धरना स्थल पर गुंडे भेजे। बात नहीं बनी तो त्योहार का बहाना बनाया गया।
आगे की रणनीति
माले व मोर्चा ने कहा-जिला प्रशासन भी तैयारी कर ले। बालमुकुंद फैक्ट्री में काले करतूत करने वाले, मजदूरों-महिलाओं का दमन करने वाले परशुराम तिवारी की पैरवी करने वाले जनप्रतिनिधियों को भी भाकपा माले की ताकत दिखाएंगे।
धरना में मौजूद रहे
मसूदन कोल, किशोर राय, सुनील ठाकुर, दिलचंद कोल, दीपक गोस्वामी, नवीन पांडेय, मोहन कोल, अरविंद टुडू, तुलसी तुरी, हुबलाल राय, बाबूलाल बास्के, भीम कोल, भिखारी राय, निमिया देवी, सरिता देवी, लालिता देवी, जसमी देवी समेत सैकड़ों महिला-पुरुष।