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टुंडी सीएचसी से ममता वाहन से निकली प्रसव पीड़ा से जूझ रही आदिवासी महिला को नर्सिंग होम में कराया भर्ती

 

प्रसव के बाद 25 हजार रुपये की मांग, मनियाडीह के बांधडीह की है पीड़ित महिला

 

देवभूमि झारखंड न्यूज ने किया खुलासा, सहिया और दलाल को मोहरा बना सरकारी डॉक्टर खेल रहा सारा खेल, सिविल सर्जन ने दिया जांच का भरोसा 

संजीत तिवारी, टुंडी(धनबाद) : धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की लाचारी का फायदा उठाने वाले दलालों के गठजोड़ को बेनकाब करता है। टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से धनबाद सदर अस्पताल के लिए रेफर की गई एक गर्भवती आदिवासी महिला को दलालों ने बहला-फुसलाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। अब वहां परिजनों से प्रसव के बदले मोटी रकम की मांग की जा रही है। इस मामले पर धनबाद के सिविल सर्जन ने भी कड़ा संज्ञान लिया है। मामला मनियाडीह के बांधडीह का है। यहां की रहने वाली निशा कुमारी को प्रसव पीड़ा होने के बाद परिजनों ने टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे कागज पर धनबाद सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल परिसर में सक्रिय एक सहिया और एक दलाल ने महिला के अनपढ़ ससुर को अपने झांसे में ले लिया। सूत्रों के अनुसार इस पूरे सिंडिकेट का सरगना एक सरकारी डॉक्टर है। उक्त नर्सिंग होम में उक्त डॉक्टर की कार भी खड़ी थी जिसे देवभूमि झारखंड न्यूज के उजागर करने के बाद हटा लिया गया। यहां से रेफर मरीज को ममता वाहन और 108 एंबुलेंस से एसएनएमएमसीएच के बजाय नर्सिंग होम ले जाने का एक सिंडिकेट काम कर रहा है। सहिया और दलाल को मोहरा बनाकर सारा खेल खेला जा रहा है। यदि इमानदारी से जांच हो तो बड़े सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है।

आरोप है कि ममता वाहन के जरिए मरीज को सदर अस्पताल ले जाने के बजाय, बलियापुर हीरक रिंग रोड स्थित निजी अस्पताल ‘एन आर एस’ (NRS Hospital) ले जाया गया। यही नहीं, ममता वाहन का भाड़ा भी सात सौ रुपये वसूला गया। निजी अस्पताल में महिला का सिजेरियन ऑपरेशन (सीजर) कर प्रसव कराया गया, जहां उसने एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के सामने 25 हजार रुपये का बिल थमा दिया।

पीड़ित के ससुर गिरधारी  के अनुसार बोला गया कि सदर अस्पताल ले जा रहे हैं। अचानक रास्ते में बोला कि जल्दी प्रसव करवाना है और एनआरएस अस्पताल ले गए। वहां भर्ती कराकर सीजर से लड़की पैदा हुई। अब अस्पताल वाले 25 हजार रुपये मांग रहे हैं। जब हमने पूछा कि पहले तो फ्री बोला था, तो अब हम गरीब लोग इतना पैसा कहां से लाएंगे?” पीड़ित परिवार बेहद गरीब है और अचानक मांगी गई इस मोटी रकम से उनके होश उड़े हुए हैं। इस पूरे मामले की जानकारी जब धनबाद के सिविल सर्जन डॉक्टर आलोक विश्वकर्मा को मिली, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया है।

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