श्री कबीर ज्ञान मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर भक्ति का महासंगम, सद्गुरु मां ज्ञान ने दिया आध्यात्मिक संदेश

श्री कबीर ज्ञान मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर भक्ति का महासंगम, सद्गुरु मां ज्ञान ने दिया आध्यात्मिक संदेश

डीजे न्यूज, गिरिडीह : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री कबीर ज्ञान मंदिर में भव्य गुरु पूजन महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने परम आराध्य सद्गुरु मां ज्ञान का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूरे मंदिर परिसर में गुरु भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर सद्गुरु के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

महोत्सव के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं बालिकाओं ने गुरु भक्ति पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। गुरु महिमा पर आधारित नाट्य मंचन ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं भजन संध्या में गूंजे गुरु महिमा के भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने अपने आध्यात्मिक अनुभव भी साझा किए।

कार्यक्रम में गुरु के विभिन्न आयामों पर विचार गोष्ठी और प्रतिउत्पन्नमति कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें शिष्यों ने गुरु के महत्व और आध्यात्मिक जीवन पर अपने विचार रखे।

अपने प्रवचन में सद्गुरु मां ज्ञान ने कहा कि भगवान शिव आदिगुरु हैं और गुरु की महिमा का वर्णन स्वयं उन्होंने माता पार्वती को किया है, जो गुरु गीता में वर्णित है। उन्होंने कहा कि जीवन की प्रत्येक उपलब्धि गुरु कृपा का प्रसाद है। सच्ची गुरु भक्ति से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और प्रकृति स्वयं ऐसे साधक की रक्षा करती है।

उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान पारब्रह्म परमेश्वर के समान है। यदि भगवान शिव रुष्ट हो जाएं तो गुरु रक्षा कर सकते हैं, लेकिन यदि गुरु रुष्ट हो जाएं तो उनकी रक्षा स्वयं शिव भी नहीं कर सकते। इसलिए प्रत्येक शिष्य को मन, वचन और कर्म से गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए तथा लोभ, मोह और अहंकार का त्याग कर सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

सद्गुरु मां ज्ञान ने श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अर्जुन मोह और संशय में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु की भूमिका निभाकर उन्हें सत्य और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि जीवन में सही दिशा और आत्मिक उन्नति के लिए सद्गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति की पहली गुरु उसकी माता होती है, लेकिन आध्यात्मिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करने वाले सद्गुरु का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। गुरु पूर्णिमा अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।

श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत यह गुरु पूर्णिमा महोत्सव सद्गुरु के आशीर्वाद और श्रद्धालुओं के सामूहिक वंदन के साथ संपन्न हुआ।

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