सब्सिडी का वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं को मिले: प्रकाश विप्लव
डीजे न्यूज, रांची: झारखंड में रूफटॉप सोलर योजना के क्रियान्वयन और सब्सिडी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोदी सरकार स्वदेशी के नाम पर जिस सब्सिडी को आम उपभोक्ताओं के लिए सौर ऊर्जा को सस्ता बनाने के उपाय के रूप में प्रचारित करती है, व्यवहार में उसका पूरा आर्थिक लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच रहा है। उक्त बातें सीपीआई (एम) के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहीं।
उन्होंने कहा कि 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट अधिकृत/सूचीबद्ध वेंडर के माध्यम से लगवाने पर लगभग ₹2.10 से ₹2.20 लाख तक की लागत बताई जा रही है। इसके बाद लगभग ₹78,000 की सब्सिडी मिलने पर उपभोक्ता की प्रभावी लागत करीब ₹1.40 लाख रह जाती है।
इसके विपरीत, उपभोक्ताओं का दावा है कि समान क्षमता का सोलर सिस्टम खुले बाजार में लगभग ₹1.20 लाख से भी कम कीमत पर उपलब्ध और स्थापित कराया जा सकता है। यदि ये आंकड़े सही हैं, तो स्थिति बेहद गंभीर है। सब्सिडी मिलने के बाद भी सूचीबद्ध व्यवस्था से लगाया गया सोलर प्लांट खुले बाजार से बिना सब्सिडी खरीदे गए प्लांट से महंगा पड़ रहा है।
सवाल यह है कि ₹78,000 की मोदी सरकारी सब्सिडी आखिर किसे सस्ता कर रही है—उपभोक्ता के सौर ऊर्जा की कीमत को या सोलर प्लांट बनाने वाली कंपनियों?
और भी गंभीर बात यह है कि यदि उपभोक्ता कम कीमत पर खुले बाजार से अपनी पसंद का मानक-गुणवत्ता वाला सोलर सिस्टम खरीदना चाहे, तो उसे योजना की मान्यता, सब्सिडी और नेट-मीटरिंग/ग्रिड क्रेडिट जैसी सुविधाओं से वंचित क्यों किया जाता है। ऐसी व्यवस्था वास्तविक प्रतिस्पर्धा को सीमित कर सकती है और उपभोक्ता को चुनिंदा सूचीबद्ध वेंडरों पर निर्भर बना सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी सब्सिडी का उद्देश्य बाजार मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर फिर सब्सिडी से कम करना नहीं, बल्कि उपभोक्ता की वास्तविक लागत कम करना होना चाहिए।
यदि सरकार ₹78,000 की सहायता को पारदर्शी तरीके से उपभोक्ता-केंद्रित बनाए तथा तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले खुले बाजार के प्रतिस्पर्धी विक्रेताओं से खरीद की अनुमति दे, तो सरकारी सहायता की समान राशि में अधिक परिवारों तक सौर ऊर्जा पहुँच सकती है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, कीमतें घटेंगी और सरकारी धन का बेहतर उपयोग होगा।
उन्होंने मोदी सरकार से पूरे मामले की तत्काल समीक्षा कराने की मांग करते हुए कहा कि 3 KW सहित विभिन्न क्षमताओं के रूफटॉप सोलर सिस्टम की सूचीबद्ध वेंडर दरों तथा खुले बाजार की वास्तविक दरों की स्वतंत्र तुलना सार्वजनिक की जाए। वेंडर चयन और मूल्य निर्धारण की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक तथा पारदर्शी बनाई जाए। तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले किसी भी सोलर सिस्टम को नेट-मीटरिंग/ग्रिड कनेक्शन से केवल इसलिए वंचित न किया जाए कि उसे किसी विशेष सूचीबद्ध विक्रेता से नहीं खरीदा गया है। सब्सिडी व्यवस्था ऐसी बनाई जाए कि उसका अधिकतम आर्थिक लाभ सीधे उपभोक्ता को मिले। यदि सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा बाजार से असामान्य रूप से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो उनकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। सरकार एक सार्वजनिक ऑनलाइन पोर्टल पर वेंडर का नाम, सिस्टम की क्षमता, उपकरणों के ब्रांड/स्पेसिफिकेशन, कुल कीमत, सब्सिडी और उपभोक्ता की वास्तविक लागत प्रकाशित करे।
सौर ऊर्जा भविष्य की जरूरत है। इसे चुनिंदा कंपनियों के लिए मुनाफे का संरक्षित बाजार नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
सरकारी सब्सिडी जनता के टैक्स का पैसा है। इसका एक-एक रुपया उपभोक्ताओं को सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने में लगना चाहिए—न कि बढ़ी हुई कीमतों को सब्सिडी देकर जायज ठहराने में।
झारखंड सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे, मूल्य निर्धारण की जांच कराए और सौर ऊर्जा योजना को वेंडर-केंद्रित नहीं बल्कि उपभोक्ता-केंद्रित बनाए।