प्रकृति बचाने को आगे आए समाज, संस्थान और आमजन : राज्यपाल
डीजे न्यूज, धनबाद : आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के गोल्डन जुबली हॉल में रविवार को आरोग्य भारती और आईआईटी (आईएसएम) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार के साथ समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगों और आम लोगों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। पर्यावरण और स्वास्थ्य एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। स्वच्छ पानी, पौष्टिक भोजन और संतुलित जीवनशैली स्वस्थ जीवन के प्रमुख आधार हैं।
कार्यशाला में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश पंडित, राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने, आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा और समाजसेवी विकास रंजन (पप्पू सिंह) समेत अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के संयोजक जय प्रकाश नारायण सिंह और अरुण राय थे।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का संरक्षण वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियां हैं। पर्यावरण प्रदूषण का सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। भारतीय जीवन पद्धति में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा रही है, इसलिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन कायम करना जरूरी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए पानी और ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के कम इस्तेमाल तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने योग, संतुलित पोषण, स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण को बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के जंगल, जल स्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन राज्य की महत्वपूर्ण संपदा हैं। विकास जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे वर्तमान की जरूरतें पूरी होने के साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहे। उन्होंने आईआईटी (आईएसएम) जैसे तकनीकी संस्थानों से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण अनुकूल तकनीक के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की अपील की।
आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता से भी है। उन्होंने रिसोर्स एफिशिएंसी, सर्कुलर इकोनॉमी, क्लीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, जिम्मेदार खनन, खदानों के पुनर्वास, वेस्ट-टू-रिसोर्स और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने की जरूरत बताई।
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने ने कहा कि संगठन केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारी से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जागरूक करने पर भी काम करता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के चार प्रमुख विषयों—पेड़, पानी, प्लास्टिक और स्वच्छता—पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत घर और परिवार से होनी चाहिए। पेड़ लगाने के साथ पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने की दर बढ़ाने, पानी के पुनर्चक्रण, रिचार्ज वेल और जल के बेहतर इस्तेमाल जैसे उपायों को अपनाने की जरूरत है।
कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और टिकाऊ विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। आयोजकों ने कार्यशाला में सामने आए सुझावों को व्यावहारिक कार्ययोजनाओं में बदलने पर जोर दिया।