पद से नहीं, संस्कारों से होती है व्यक्ति की असली पहचान : इंदु देवी
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में वंदना सभा के दौरान अभिभाविका ने बच्चों को दिया संस्कार और नैतिक मूल्यों का संदेश
डीजे न्यूज, गिरिडीह : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में शनिवार, 25 अक्टूबर को आयोजित वंदना सभा में मुख्य अतिथि के रूप में अभिभाविका श्रीमती इंदु देवी शामिल हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंदु देवी एवं आचार्या सरिता कुमारी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और पुष्पार्चन कर किया। इसके बाद भैया-बहनों ने सामूहिक वंदना प्रस्तुत की। वरिष्ठ आचार्या सरिता दीदी ने मुख्य अतिथि का आत्मीय परिचय कराते हुए उनका अभिनंदन किया। वहीं, आचार्या मेनका दीदी ने अंगवस्त्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
अपने संबोधन में इंदु देवी ने कहा कि विद्यालय में आकर उनका हृदय प्रसन्न हो गया। वह लंबे समय से इस विद्या मंदिर की शैक्षणिक और संस्कारपरक गतिविधियों से प्रभावित रही हैं। आज के दौर में जब चारों ओर भाग-दौड़ और तनाव का माहौल है, ऐसे में विद्यालय के बच्चों का प्रतिदिन वंदना सभा में शांतचित्त होकर ध्यान लगाना इसकी बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े अधिकारी बनेंगे। लेकिन जीवन में केवल ऊंचा पद हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। **पद से बड़ा संस्कार होता है, क्योंकि संस्कारवान व्यक्ति ही समाज और देश के सच्चे निर्माण में योगदान देता है।**
इंदु देवी के प्रेरणादायी संबोधन का उपस्थित आचार्याओं और विद्यार्थियों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में आचार्या सरिता दीदी ने मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया।