पंचपदी शिक्षण पद्धति से प्रभावी बनेगी पढ़ाई, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आचार्यों को मिला प्रशिक्षण
डीजे न्यूज, गिरिडीह : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में बुधवार को विभाग निरीक्षक ब्रजेश कुमार के प्रवास के दौरान शिक्षण गुणवत्ता और विद्यालय के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने आचार्यों एवं दीदी जी से पंचपदी शिक्षण पद्धति को आधार बनाकर विद्यार्थियों को पढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिक्षण से ही बच्चों में विषयों की बेहतर समझ विकसित की जा सकती है और शिक्षा को स्थायी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदना सत्र में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुई। प्रधानाचार्य आनंद कमल, प्रवासी कार्यकर्ता सलमान होजाई और विभाग निरीक्षक ब्रजेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया। इसके बाद आचार्य बंधुओं एवं दीदी जी ने सामूहिक वंदना की। प्रधानाचार्य ने मुख्य अतिथि का परिचय कराते हुए उनका स्वागत किया।
अपने संबोधन में विभाग निरीक्षक ब्रजेश कुमार ने संगठन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन में किसी व्यक्ति विशेष से अधिक महत्व संगठन का होता है। सभी को आत्मीय भाव से संगठन से जुड़कर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आचार्यों को पंचपदी शिक्षण पद्धति के पांच सोपानों—अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार—के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा देनी चाहिए। इस पद्धति से बच्चों में विषयों की समझ विकसित होने के साथ-साथ अर्जित ज्ञान को व्यवहार में उतारने की क्षमता भी बढ़ती है।
इस अवसर पर आचार्य राजीव सिन्हा ने सभी आचार्य-दीदी जी को पाठ योजना तैयार करने का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। वहीं, नलिन आचार्य, विकास आचार्य और राजेश नंदन आचार्य ने प्रभावी पीपीटी निर्माण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने, शिक्षण कार्य को प्रभावी करने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।