ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करेंगे आईआईटी (आईएसएम) के शोधार्थी, सीएचटी से हुआ पांच साल का करार
10 पीएचडी स्कॉलर्स को मिलेगी 25 फीसदी अधिक फेलोशिप, ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर कार्बन कैप्चर तक विभिन्न क्षेत्रों में होगा शोध
डीजे न्यूज, धनबाद : ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) के साथ पांच साल का समझौता किया है। इसके तहत पीएचडी शोधार्थियों को विशेष फेलोशिप देने के साथ ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों पर संयुक्त रूप से रिसर्च की जाएगी।
गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट (ईटीएम-2026) के दौरान इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। सीएचटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शंकर गुणशेखरन और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. पार्थसारथी दास ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल, ज्वाइंट सेक्रेटरी (गैस) एवं चीफ विजिलेंस ऑफिसर आलोक त्रिपाठी तथा संस्थान के एसोसिएट डीन प्रो. एजाज अहमद मौजूद थे।
समझौते के तहत सीएचटी-आईआईटी (आईएसएम) रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसमें एक समय में अधिकतम 10 पीएचडी शोधार्थियों को फेलोशिप मिलेगी। चयनित शोधार्थियों को सीएसआईआर/यूजीसी की निर्धारित दरों से 25 प्रतिशत अधिक राशि दी जाएगी। सीनियर रिसर्च फेलोशिप के स्तर पर यह राशि 52,500 रुपये प्रतिमाह होगी। इसके अतिरिक्त नियमानुसार एचआरए, प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये कंटिजेंसी ग्रांट और शोध सामग्री के लिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। फेलोशिप की अवधि चार साल होगी, जिसे विशेष मंजूरी से एक साल तक बढ़ाया जा सकेगा।
इस साझेदारी के तहत ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रोलाइजर, फ्यूल सेल, एडवांस्ड बैटरी, एनर्जी स्टोरेज, कार्बन कैप्चर और कार्बन डाइऑक्साइड से रसायन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध होगा। इसके अलावा क्लीनर फ्यूल, पेट्रोकेमिकल्स, कोयला एवं बायोमास गैसीफिकेशन, वेस्ट मैनेजमेंट, जल संरक्षण और डिजिटल तकनीक पर भी काम किया जाएगा।
आईआईटी (आईएसएम) के डीन प्रो. पार्थसारथी दास ने कहा कि इस सहयोग से उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप पीएचडी शोध को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोधार्थियों को ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा।
समझौते के तहत ज्वाइंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, टेस्टिंग फैसिलिटी, प्रायोजित शोध और उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है। इसके अलावा फैकल्टी सदस्यों को उद्योगों के साथ काम करने और विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित नीतिगत सुझाव देने के लिए एनर्जी थिंक टैंक स्थापित करने की भी तैयारी है।
एमओयू में शोध के दौरान विकसित तकनीकों के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) की सुरक्षा और उनके व्यावसायिक उपयोग का प्रावधान भी किया गया है। शोध आधारित स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे संस्थान का शोध सीधे औद्योगिक जरूरतों से जुड़ेगा और ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को गति मिलेगी।