मरांग बुरु की धरती पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, महासम्मेलन में पहुंचे सीएम हेमंत और कल्पना सोरेन
डीजे न्यूज, पीरटांड़ (गिरिडीह) : पारसनाथ की पवित्र धरती मधुबन गुरुवार को आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा के रंग में सराबोर नजर आई। मरांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन में देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और आदिवासी समाज के लोग जुटे। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की गूंज, धार्मिक जयघोष और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पूरा मधुबन भक्तिमय हो उठा। महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी शामिल हुए।
झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु इस आयोजन में पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के आगमन पर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम मांझीथान में पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा अर्पित की। इस दौरान समाज की धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान का संरक्षण एवं संवर्धन करना रहा। साथ ही मरांग बुरु की पवित्रता और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श कर समाज में एकजुटता का संदेश दिया गया।
इतने बड़े आयोजन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम में मरांगबुरू बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, डॉ. जगजीवन मुर्मू, सोमय टुडू, जंशाई मारडी, दुर्गा चरण मुर्मू, रमेश टुडू, सोनाराम हेंब्रम, एतो बास्के, नारायण मुर्मू, महावीर बास्के, दिलीप मुर्मू, दीपीन सोरेन, चन्द्रमोहन मुर्मू, शनिवार बेसरा, अशोक मुर्मू, भगवान किस्कू और राजेश हांसदा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मधुबन में आयोजित यह महासम्मेलन आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में सामने आया। मरांग बुरु की पवित्र धरती से समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया गया।