महेशलुंडी के सोनल कंधवे बने मिसाल : आठ गायों से शुरू किया था सफर, आज आधुनिक डेयरी के मालिक

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महेशलुंडी के सोनल कंधवे बने मिसाल : आठ गायों से शुरू किया था सफर, आज आधुनिक डेयरी के मालिक

डीजे न्यूज, गिरिडीह : महेशलुंडी गांव के युवा पशुपालक सोनल कांडवेय ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, आधुनिक सोच और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है। कभी केवल 8 पशुओं के साथ शुरू हुआ उनका डेयरी व्यवसाय आज 50 दुधारू पशुओं की आधुनिक डेयरी इकाई के रूप में विकसित हो रहा है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ क्षेत्र के पशुपालकों बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है।

वर्ष 2010 में छोटे स्तर पर डेयरी फार्म की शुरुआत करने वाले सोनल कांडवेय ने शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय वैज्ञानिक पशुपालन को अपनाया। पशुओं के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन और उन्नत ब्रीडिंग तकनीकों के सहारे उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को लगातार विस्तार दिया। आज उनका फार्म आधुनिक डेयरी प्रबंधन का सफल उदाहरण माना जा रहा है।

पशुओं के लिए हरे चारे की निर्भरता बाजार पर न रहे, इसके लिए सोनल स्वयं लगभग 10 एकड़ भूमि पर बाजरा, मक्का और बरसीम की खेती करते हैं। साथ ही मक्का से साइलेज तैयार कर पूरे वर्ष पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। उनके फार्म में हर साल करीब 100 टन साइलेज का उत्पादन होता है, जिससे दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

डेयरी व्यवसाय के साथ-साथ वे जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं। फार्म से प्राप्त गोबर का उपयोग खेतों में प्राकृतिक खाद के रूप में किया जाता है, जबकि वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के माध्यम से जैविक खाद तैयार कर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा रही है। इससे खेती की लागत कम हुई है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला है।

सोनल कांडवेय की सफलता को नई ऊंचाई तब मिली जब वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें झारखंड सरकार की कामधेनु डेयरी फार्मिंग योजना का लाभ मिला। लगभग 39.75 लाख रुपये की परियोजना के तहत 50 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्वीकृत हुई। पहले चरण में 25 पशुओं की खरीद की जा चुकी है, जबकि शेष पशुओं को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

सोनल का मानना है कि डेयरी व्यवसाय में सफलता केवल दूध बेचने से नहीं मिलती, बल्कि चारा उत्पादन, साइलेज निर्माण, वैज्ञानिक ब्रीडिंग और जैविक खाद निर्माण जैसे सभी पहलुओं पर समान रूप से काम करना पड़ता है। इसी सोच ने उनके फार्म को एक समग्र कृषि एवं पशुपालन मॉडल में बदल दिया है।

सरकारी सहयोग से मिला नया विस्तार

सोनल कांडवेय अपनी उपलब्धि का श्रेय झारखंड सरकार और गव्य विकास विभाग के सहयोग को भी देते हैं। उनका कहना है कि विभाग की ओर से समय-समय पर मिले प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं के लाभ ने उनके डेयरी व्यवसाय को नई दिशा दी। कामधेनु डेयरी फार्मिंग योजना उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई है।

आज उनका डेयरी फार्म न केवल आय का मजबूत स्रोत बना है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन चुका है। उनकी कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के बल पर ग्रामीण युवा भी सफलता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं।

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