मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा एवं प्राण-प्रतिष्ठा  वार्षिकोत्सव का भव्य शुभारंभ माता के जयकारों से गूंजा जागृत मंदिर चिरागोड़ा 501 महिलाओं ने मंगल कलश लेकर किया नगर भ्रमण भागवत कथा श्रवण से जीवन होता है धन्य : उज्ज्वल शांडिल्य

मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा एवं प्राण-प्रतिष्ठा  वार्षिकोत्सव का भव्य शुभारंभ

माता के जयकारों से गूंजा जागृत मंदिर चिरागोड़ा

501 महिलाओं ने मंगल कलश लेकर किया नगर भ्रमण

भागवत कथा श्रवण से जीवन होता है धन्य : उज्ज्वल शांडिल्य

डीजे न्यूज, धनबाद : जागृत मंदिर, चिरागोड़ा के तृतीय स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित  सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ एवं प्राण-प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव  के पहले दिन बुधवार को मंदिर परिसर से 501 महिलाएं सर पर मंगल कलश व भागवत महापुराण लेकर नगर भ्रमण को निकली। गाजे-बाजे व आकर्षक झांकी के साथ निकली कलश यात्रा में माता रानी के जयकारे से पूरा माहौल गूंजायमान हो रहा था। कलश यात्रा मंदिर से निकलकर लोको टैंक पहुंची जहां से जल लेकर हीरापुर पार्क मार्केट होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। नगर भ्रमण मे महिलाओं के साथ काफी संख्या मे श्रद्धालू माता की जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।

भागवत कथा श्रवण से जीवन होता है धन्य : उज्ज्वल शांडिल्य

श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है। श्रद्धा से कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और जीवन में भक्ति का संचार होता है। उक्त बातें जागृत मंदिर चिरागोड़ा में आयोजित भागवत कथा के पहले दिन वृंदावनधाम धाम से आए भगवताचार्य उज्जवल शांडिल्य महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और भागवत कथा का श्रवण मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल साधन है। कथा सुनने से पहले मन, वचन और आचरण की पवित्रता आवश्यक है। केवल शरीर से उपस्थित होना पर्याप्त नहीं, मन भी कथा में लगना चाहिए। गुरु के बिना भगवान की प्राप्ति कठिन है। गुरु ही जीव को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल भोग-विलास में नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और सत्संग में लगाना चाहिए। भगवान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग विनम्रता, सेवा और प्रेम है, अहंकार नहीं।
कथा के दौरान एक से एक भजन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।
समिति के सह सचिव  बिल्लू गुप्ता ने बताया कि कथा का वाचन 14 जुलाई तक प्रतिदिन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 13 जुलाई से 15 जुलाई तक मंदिर में वार्षिकोत्सव एवं प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न होंगे। वहीं 15 जुलाई को पूर्णाहुति के उपरांत रात्रि में भव्य भगवती जागरण एवं आकर्षक धार्मिक झांकियों की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर 16 जुलाई को पूर्णाहुति के बाद महा भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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