केंदुआडीह में भू-धंसान और गैस रिसाव पर मंथन, मानसून में बढ़ सकता खतरा

Advertisements

केंदुआडीह में भू-धंसान और गैस रिसाव पर मंथन, मानसून में बढ़ सकता खतरा

डीजे न्यूज, केंदुआ (धनबाद) : केंदुआडीह में भू-धंसान और गैस रिसाव की लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर शनिवार को केंदुआडीह हिंदी भवन में वैज्ञानिकों और बीसीसीएल पीबी एरिया के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में भू-धंसान और गैस रिसाव की स्थिति, अब तक किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों तथा आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन और वर्तमान हालात की जानकारी साझा की। विशेष रूप से मानसून के दौरान वाटर गैस की मात्रा बढ़ने की आशंका और उससे लोगों के स्वास्थ्य एवं आसपास के क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

बैठक के बाद पीएमआरसी के वैज्ञानिक प्रोफेसर एन सहाय ने बताया कि जहरीली गैस की जांच वैज्ञानिकों की टीम लगातार कर रही है। उन्होंने कहा कि वाटर गैस के उत्सर्जन के कारण सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और वर्तमान में वह सड़क सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने बताया कि मानसून से पहले वेटिंग पाइप लगाकर 13 नंबर सीम से गैस बाहर निकाली जा रही है। साथ ही 14 नंबर सीम से भी गैस निकालने के लिए वेटिंग पाइप लगाने की योजना बनाई गई है। गैस के प्रभाव को कम करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि मानसून आने से पहले गहन अध्ययन कर जल्द किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जरूरी है, क्योंकि गैस से खतरा अभी भी बना हुआ है। आईआईटी (आईएसएम) के प्रोफेसर डीपी मिश्रा ने कहा कि अध्ययन के दौरान हाइड्रोजन और सीओ गैस के उत्सर्जन की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई थी। गैस के प्रभाव को कम करने के लिए नाइट्रोजन फ्लॉसिंग का कार्य किया गया था, लेकिन यह उपाय केवल अल्पकालिक रूप से प्रभावी साबित हुआ। उन्होंने बताया कि दीर्घकालिक समाधान के लिए भी सुझाव दिए गए हैं। पीबी एरिया के महाप्रबंधक जीसी साहा ने कहा कि गैस के प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न वैज्ञानिक एजेंसियों को लगाया गया है। वैज्ञानिकों की टीम लगातार क्षेत्र में काम कर रही है। बैठक में उन्हीं के कार्यों और सुझावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि फिलहाल छह परिवारों को बेलगढ़िया में शिफ्ट कराया गया है। उपायुक्त धनबाद के निर्देश पर बेलगढ़िया में स्किल डेवलपमेंट सेंटर, अस्पताल, पोस्ट ऑफिस और स्कूल जैसी सुविधाएं लोगों के लिए तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान वाटर गैस बढ़ने की आशंका है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। बैठक में पीएमआरसी के प्रोफेसर एन सहाय, ए. सैनी, आईआईटी (आईएसएम) के प्रोफेसर डीपी मिश्रा, प्रोफेसर अंकुश गालव, जीएम सेफ्टी धनराज अखरे, पीबी एरिया जीएम जीसी साहा, जीएम माइनिंग जेके दास, एजीएम एसके सिंह, आईएसओ के विक्रांत कुमार, पीबी एरिया सेफ्टी ऑफिसर जीके सिंह, पीओ एन राय, जेके सिंह, मैनेजर अजीत कुमार, सर्वेयर पवन कुमार, वर्कमैन इंस्पेक्टर रामनाथ श्रीवास्तव, निर्मल कुमार सहित अन्य अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद थे।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top