काश, कामरेड राजकुमार यादव के साथ भी इसी मजबूती से खड़ी रहती माले

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काश, कामरेड राजकुमार यादव के साथ भी इसी मजबूती से खड़ी रहती माले

2018 के राज्यसभा चुनाव में वोट रद्द होने पर पार्टी ने किया था निलंबित, सभी पदों से हटाया था

2024 के विधानसभा चुनाव में बगोदर, सिंदरी व निरसा को मिला झामुमो का साथ, लेकिन राजधनवार में हुई सीधी लड़ाई

दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता देवभूमि झारखंड न्यूज, धनबाद : राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के सहारे भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी विजयी हो गए हैं। उनकी इस जीत ने राज्य के सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी और चुनाव एजेंट के. राजू ने सीधा आरोप लगाया है कि भाकपा माले और राजद के विधायकों ने गठबंधन एवं कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को वोट नहीं दिया। इसका सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि राजद और माले के विधायकों ने परिमल नाथवानी के पक्ष में मतदान किया।

अपने दोनों विधायकों निरसा के अरूप चटर्जी और सिंदरी के चंद्रदेव उर्फ बबलू महतो पर लगे इस खुले आरोप से माले तिलमिला गई है। माले के राज्य सचिव मनोज भक्त से लेकर राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य तक अपने विधायकों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। माले के निशाने पर कांग्रेस प्रभारी के. राजू हैं और पार्टी उनके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। माले के इस तेवर से उसके समर्थक और कार्यकर्ता उत्साहित हैं। वहीं समर्थकों का एक बड़ा वर्ग यह भी कह रहा है कि काश, माले इसी मजबूती से कामरेड राजकुमार यादव के साथ खड़ी होती, तो आज राजधनवार और बगोदर के साथ-साथ कोडरमा लोकसभा सीट पर भी उसका कब्जा हो सकता था।

बहुत से लोग कामरेड राजकुमार यादव के मामले से अनभिज्ञ होंगे। मामला वर्ष 2018 के राज्यसभा चुनाव का है। उस समय राजकुमार यादव झारखंड में माले के एकमात्र विधायक थे। उन्होंने राजधनवार विधानसभा क्षेत्र से झारखंड के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी को हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। माले ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी धीरज साहू को वोट देने का निर्णय लिया था। 23 मार्च 2018 को हुए चुनाव में राजकुमार यादव ने धीरज साहू के पक्ष में मतदान करने के साथ-साथ नोटा का भी इस्तेमाल कर दिया था। इसके कारण उनका मत रद्द हो गया। आरोप लगा कि उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया, जबकि राजकुमार यादव लगातार कहते रहे कि यह तकनीकी भूल थी और उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था।

उस समय माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजकुमार यादव को पार्टी से निलंबित करने तथा सभी पदों से हटाने की घोषणा की थी। साथ ही यह भी कहा था कि वोट रद्द होने के मामले की जांच पार्टी की केंद्रीय कमेटी करेगी। माले का तर्क था कि राजनीतिक विरोधी पार्टी की साख और इतिहास पर कीचड़ उछाल रहे हैं और पार्टी अपनी छवि धूमिल नहीं होने देगी। हालांकि कुछ समय बाद उनका निलंबन वापस ले लिया गया, लेकिन पार्टी में उनका राजनीतिक कद पहले जैसा नहीं रहा। वे लगातार राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ते गए। एक वर्ष बाद हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कोडरमा लोकसभा क्षेत्र, जहां वे भाजपा के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे, वहां भी उन्हें करारी हार मिली।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार महागठबंधन ने कोडरमा सीट पर माले को समर्थन दिया, लेकिन इस बार प्रत्याशी राजकुमार यादव नहीं बल्कि विनोद सिंह थे। विनोद सिंह भी भाजपा प्रत्याशी अन्नपूर्णा देवी से चुनाव हार गए। राजकुमार यादव के साथ पिछले विधानसभा चुनाव में भी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं रहीं। माले ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें बगोदर, निरसा और सिंदरी में उसे महागठबंधन का समर्थन मिला। जबकि चौथी सीट राजधनवार, जहां से राजकुमार यादव उम्मीदवार थे, वहां महागठबंधन का साथ नहीं मिला। जबकि सबसे अधिक आवश्यकता राजधनवार में ही थी, क्योंकि वहां भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मैदान में थे।

यदि महागठबंधन यहां एकजुट होकर चुनाव लड़ता, तो बाबूलाल मरांडी की घेराबंदी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। राजधनवार में माले और झामुमो के बीच दोस्ताना संघर्ष हुआ। झामुमो ने वहां अपने पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी को मैदान में उतारा। माले और झामुमो के इस दोस्ताना मुकाबले ने बाबूलाल मरांडी की जीत की राह अपेक्षाकृत आसान कर दी।

इस संबंध में पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने देवभूमि झारखंड न्यूज से बातचीत में कहा कि उनके मामले में जांच की कोई जरूरत ही नहीं थी। मैंने मतदान के बाद बाहर निकलकर खुद कह दिया था कि कांग्रेस प्रत्याशी के साथ-साथ नोटा को भी गलती से वोट दे दिया। यदि मेरी नीयत क्राॅस वोटिंग की होती तो मैं बोलता क्यों? मैं यदि क्रॉस वोटिंग करता तो उस वक्त के प्रत्याशी प्रदीप संथालिया की जीत आसानी से हो जाती। पिछले विधानसभा चुनाव में राजधनवार सीट पर महागठबंधन का साथ नहीं मिलने का भी दर्द राजकुमार यादव की बातों से छलका। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का यदि साथ मिलता तो आसानी से हम राजधनवार में बाबूलाल मरांडी को हराकर चुनाव जीत जाते। राजधनवार में झामुमो ने प्रत्याशी उतारकर कहीं न कहीं से बाबूलाल मरांडी को आंतरिक सपोर्ट किया। बावजूद माले मजबूती से महागठबंधन के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस चाहती है कि छोटी पार्टियां झामुमो से अलग हो जाए। इससे उसका दबाव झामुमो पर बढ़ जाएगा।

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