जेपीएससी और जेएसएससी के अभ्यर्थियों को भाजपा भटकाना बंद करे : वामदल
डीजे न्यूज, रांची: जेपीएससी और जेएसएससी के अभ्यर्थियों व छात्रों के चल रहे आंदोलन के साथ वामदल ने अपनी एकजुटता दोहराई है। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भाजपा का नेतृत्व छात्रों को भटकाने की साजिश में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री द्वारा गठित चार मंत्रियों के समुह से आंदोलनकारियों की सकारात्मक वार्ता चल रही है, उसी समय बीजेपी के नेता आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच जाकर उनके बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और एनटीए को रद्द किए जाने के मुद्दे पर हुए अभूतपूर्व छात्र आंदोलन से भाजपा डरी हुई है। इस सफल आंदोलन के चलते ही धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा और प्रधानमंत्री समेत भाजपा नेताओं के बड़बोलेपन की कलई खुल गयी क्योंकि दिल्ली पुलिस के भारी दमन के बावजूद छात्र पीछे नहीं हटे। झारखंड में राज्य सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना जिससे भाजपा बौखला गयी है और वह नहीं चाहती है कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में पिछली सभी सरकारों की करतूतें सामने आए क्योंकि इसमें भाजपा – आजसू की संलिप्तता भी सामने आएगी।
जेपीएससी के निवृतमान अध्यक्ष की गिरफ्तारी, वर्तमान अध्यक्ष का इस्तीफा और उनसे लंबी पूछ-ताछ तथा सीआईडी द्वारा जेपीएससी से जूड़े कई लोगों की गिरफ्तारी इस बात को रेखांकित करता है की राज्य सरकार ने जांच के प्रति गंभीरता दिखायी है।
बीजेपी द्वारा सीबीआई जांच की मांग मामले को लटकाने का षडयंत्र है क्योंकि पहली और दूसरी जेपीएससी में हुई घांधली की जांच में सीबीआई ने जान बूझकर काफी विलंब किया। साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतियोगी परीक्षाओं के मामले को जान बूझकर नहीं ले जाने की जिम्मेवार भी सीबीआई ही है।
वामदल शुरू से राज्य सरकार से मांग करते आ रहे हैं की आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत कर समस्या का हल निकाला जाए। यदि अभ्यर्थियों द्वारा न्यायिक जांच की मांग की जाती हैं तब राज्य सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय के लिए तैयारी रखनी चाहिए। वामदल भाजपा के षड्यंत्रकारी भूमिका की कड़ी भर्त्सना करती है की वह मामले का निदान किए जाने के बजाय अपने छुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
वामदल राज्य सरकार के इस कदम से असहमति व्यक्त करते हैं की मंत्रियों के समुह द्वारा प्रतियोगिता परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के अलावा जेकेएलएम, एनएसयूआई और आदिवासी छात्र संघ से बातचीत की जा रही है तब वाम छात्र संगठनों को वार्ता के लिए क्यों नहीं बुलाया गया है।