गिरिडीह कॉलेज में वित्तीय अनियमितता के आरोप, एबीवीपी ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

गिरिडीह कॉलेज में वित्तीय अनियमितता के आरोप, एबीवीपी ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

डीजे न्यूज, गिरिडीह : गिरिडीह कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जिला इकाई ने रविवार को बस स्टैंड के समीप एक होटल में प्रेस वार्ता कर कॉलेज में कथित तौर पर हुई वित्तीय गड़बड़ियों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

प्रेस वार्ता में एबीवीपी के प्रदेश सह संयोजक मंटू मुर्मू, जिला संयोजक नीरज चौधरी एवं एसएफएस सह संयोजक अनीश रॉय ने प्रभारी प्राचार्य डॉ. एमएन सिंह सहित कुछ शिक्षकों पर कई गंभीर आरोप लगाए।

एबीवीपी नेताओं का आरोप है कि दिसंबर 2025 में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एमएन सिंह युवा महोत्सव में टीम मैनेजर के रूप में हजारीबाग में मौजूद थे। इसके बावजूद उसी अवधि में गिरिडीह कॉलेज में आयोजित इग्नू परीक्षा में उनकी ड्यूटी दर्शाकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। संगठन का दावा है कि शिकायत के बाद इग्नू स्तर पर हुई जांच में मामला सामने आने के पश्चात संबंधित राशि वापस की गई।

संगठन ने परीक्षा ड्यूटी, भुगतान, बैंक खाते से राशि निकासी और कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े मामलों की भी जांच कराने की मांग की। एबीवीपी नेताओं के अनुसार, प्रोफेसर डॉ. प्रभास मणि पाठक के नाम से कथित तौर पर हस्ताक्षर कर राशि की निकासी किए जाने का भी आरोप है।

इसके अलावा एबीवीपी ने पांच मार्च 2025 को कॉलेज के संयुक्त खाते से करीब सवा लाख रुपये की निकासी में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की। संगठन ने प्रभारी प्राचार्य एवं अन्य शिक्षकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति की जांच कराने की मांग भी की है।

प्रेस वार्ता में कॉलेज में सुरक्षा प्रभारी के पद पर एक व्यक्ति की नियुक्ति और उसकी उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए। एबीवीपी नेताओं का कहना है कि यदि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो कॉलेज में पिछले कई वर्षों से चली आ रही कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने तथा कॉलेज में वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।

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