जेल भरो आंदोलन में सौ से अधिक मजदूर-किसानों ने दी गिरफ्तारी अल्बर्ट एक्का चौक से केंद्र की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार हुंकार

जेल भरो आंदोलन में सौ से अधिक मजदूर-किसानों ने दी गिरफ्तारी

अल्बर्ट एक्का चौक से केंद्र की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार हुंकार

डीजे न्यूज, रांची: भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) तथा स्वतंत्र फेडरेशनों एवं यूनियनों के संयुक्त मंच के देशव्यापी आह्वान पर सोमवार को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर संयुक्त जेल भरो आंदोलन आयोजित किया गया। केंद्र सरकार की जनविरोधी, मजदूर-किसान विरोधी और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों और मेहनतकशों ने सामूहिक रूप से गिरफ्तारी दी।

अल्बर्ट एक्का चौक पर आयोजित सभा में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने “देश बचाओ–जनता बचाओ–संविधान बचाओ–लोकतंत्र बचाओ”, “चारों लेबर कोड वापस लो”, “किसानों को कानूनी MSP दो” तथा “निजीकरण बंद करो” जैसे नारे लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।

प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने जानबूझकर सामूहिक गिरफ्तारी दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर कोतवाली थाना, रांची ले जाया, जहां थोड़ी देर बाद सभी को रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह और संघर्ष का संकल्प पूरी तरह कायम रहा।

संयुक्त मंच ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की नीतियां देश के मेहनतकश लोगों की कीमत पर बड़े कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए बनाई जा रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों तथा सरकारी संस्थानों को लगातार निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। रेलवे, बैंक, बीमा, बिजली, कोयला और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण तथा ठेकेदारीकरण से रोजगार और श्रमिकों के अधिकारों पर लगातार हमला हो रहा है।

मंच ने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूरों को अधिकार देने के बजाय मालिकों को मनमानी करने की छूट देने वाले कानून हैं। इन कोडों के जरिए स्थायी रोजगार को कमजोर किया जा रहा है, यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है तथा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से वंचित करने की जमीन तैयार की जा रही है। संयुक्त मंच ने स्पष्ट कहा कि मजदूर इन कानूनों को स्वीकार नहीं करेंगे और इन्हें रद्द कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।

किसानों के सवाल पर मंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के आंदोलन के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्जमाफी और किसानों के भूमि एवं आजीविका अधिकार अब भी अधूरे हैं। कृषि क्षेत्र को कॉरपोरेट नियंत्रण में देने की कोशिशों का किसानों और खेत मजदूरों द्वारा लगातार प्रतिरोध किया जाएगा।

संयुक्त मंच ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है, लेकिन सरकार सरकारी रिक्त पदों को भरने के बजाय रोजगार के अवसरों को लगातार सीमित कर रही है। पेपर लीक और भर्ती घोटालों से युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। मनरेगा को कमजोर किया जा रहा है और ग्रामीण तथा शहरी गरीबों के लिए रोजगार के अवसर घटाए जा रहे हैं।

मंच ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की लोकतांत्रिक और सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर करने तथा संघीय ढांचे पर हमला करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। असहमति की आवाज को दबाने और जन आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं।

संयुक्त मंच ने कहा कि 10 अगस्त का जेल भरो आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की मेहनतकश जनता की एकजुट प्रतिरोध शक्ति का प्रदर्शन है। जब सरकार जनता की आवाज सुनने से इनकार करती है, तब मजदूर-किसान सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

मुख्य मांगें

– चारों लेबर कोड तत्काल रद्द करो।
– बेलगाम निजीकरण और ठेकेदारीकरण पर रोक लगाओ।
– C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी दो।
– किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी करो।
– मनरेगा को मजबूत करो और काम की मांग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार दो।
– ग्रामीण के साथ-साथ शहरी रोजगार की कानूनी गारंटी लागू करो।
– पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करो।
– समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करो।
– सभी मजदूरों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा लागू करो।
– सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करो।
– सरकारी विभागों में सभी रिक्त पदों को तत्काल भरो।

संयुक्त मंच ने कहा कि कॉरपोरेट मुनाफे के लिए देश की संपत्ति लूटने की नीति और जनता के अधिकारों को कुचलने की कोशिशों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। मजदूर, किसान, खेत मजदूर, कर्मचारी, युवा, महिलाएं और मेहनतकश जनता मिलकर इस संघर्ष को और व्यापक बनाएंगे।

मंच ने घोषणा की कि जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष रुकेगा नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा।

जेल भरो आंदोलन में प्रकाश विप्लव, भवन सिंह, हरेन्द्र यादव, महेंद्र कुमार, प्रफुल्ल लिंडा, बीना लिंडा, नवीन चौधरी, के.आर. चौधरी, एस.के. राय, राकेश कुमार, अनिर्बान बोस, सुखनाथ लोहरा, प्रकाश टोप्पो, कपिल महतो, नीमा तिर्की, सीमा केरकेट्टा, दानिश, शुभेंदु सेन, प्रफुल्ल लिंडा, भीम साहू, अजय सिंह, अफजल दुर्रानी, मंजू देवी, सुदामा खलखो, मो. नसीम, विनोद साहू, मो. अकरम आदि थे।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top