जब तक शिक्षक अपनी ज्ञान-परंपरा पर गर्व नहीं करेंगे, तब तक राष्ट्र-स्वाभिमान अधूरा 

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जब तक शिक्षक अपनी ज्ञान-परंपरा पर गर्व नहीं करेंगे, तब तक राष्ट्र-स्वाभिमान अधूरा 

स्कॉलर बीएड कॉलेज के बौद्धिक महायज्ञ में गूंजा प्राचीन भारत का गौरव 

डीजे न्यूज, गिरिडीह : स्कॉलर बीएड कॉलेज के प्रांगण में चल रहे पांच दिवसीय व्याख्यानमाला के तृतीय सत्र का आयोजन गुरुवार को अत्यंत भव्यता, ओज और साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के संकल्प के साथ आयोजित इस सत्र का मुख्य विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन भारत में गणित का योगदान” रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता आदर्श कॉलेज, राजधनवार के प्रखर प्रज्ञा-पुंज व प्राचार्य डॉ. बिमल कुमार मिश्रा, स्कॉलर बीएड कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला एवं डीएलएड प्रभारी डॉ. हरदीप कौर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं माँ शारदे के चरणों में पुष्प अर्पित कर किया। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक रूप से प्राचार्य डॉ शालिनी खोवाला ने शॉल, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया।

 वैचारिक क्रांति और आत्मबोध है व्याख्यानमाला का लक्ष्य

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला ने स्वागत भाषण में कार्यक्रम के दूरगामी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस व्याख्यानमाला का मूल ध्येय भावी शिक्षकों के भीतर से उस मानसिक हीनभावना को समूल नष्ट करना है, जो यह मानती है कि सारा विज्ञान और गणित पश्चिम की देन है। जब तक हमारे शिक्षक खुद अपनी जड़ों और समृद्ध विरासत से गौरवान्वित नहीं होंगे, तब तक वे आने वाली पीढ़ी में राष्ट्र-स्वाभिमान का बीज नहीं बो पाएंगे।

भारत सदैव से ज्ञान, संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान, नैतिक मूल्यों एवं मानव कल्याण की पवित्र भूमि रहा है। हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की गौरवगाथा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक प्रकाश है।

डॉ. बिमल मिश्रा मुख्य वक्ता के रूप में पोडियम को सुशोभित करते हुए कहा कि जब दुनिया विज्ञान की वर्णमाला नहीं जानती थी, तब भारत ब्रह्मांड नाप रहा था

प्रख्यात विद्वान डॉ. बिमल कुमार मिश्रा ने अपने ओजस्वी और मंत्रमुग्ध कर देने वाले साहित्यिक व्याख्यान से पूरे सभागार में चेतना का संचार कर दिया। उन्होंने वेदों, उपनिषदों और प्राचीन ग्रंथों के उदाहरण देते हुए कहा, “जब दुनिया आधुनिक विज्ञान की वर्णमाला से भी अपरिचित थी, तब भारत के ऋषियों-मुनियों ने वेदों के ज्यामिति सूत्रों, आर्यभट्ट के शून्य, ब्रह्मगुप्त के सिद्धांतों और भास्कराचार्य की गणनाओं से पूरे ब्रह्मांड का भूगोल और खगोल नाप लिया था।” उन्होंने भावी राष्ट्र-निर्माताओं (प्रशिक्षुओं) का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान की इस मशाल को लेकर उन्हें समाज के अंतिम कोने तक जाना है।

 इस अवसर पर के एन बक्शी कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापकगण एवं कुछ प्रशिषुगण मौजूद रहे।

मंच का सफल संचालन डॉ. संतोष चौधरी द्वारा किया गया, जिनकी प्रभावी संवाद शैली ने पूरे कार्यक्रम में समां बांधे रखा। कार्यक्रम का समापन संपूर्ण प्रबुद्ध जनों के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक गण, ऑफिस कर्मचारी जयकिशोर शाही, अजय, मनीष आदि एवं स्कॉलर के सभी प्रशिक्षु, केएन बक्शी के प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

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