हार का हैंगओवर, सुधार का नो-एंट्री!
मस्तराम की चौपाल
दिलीप सिन्हा : शहर की सत्ता की दौड़ में भाजपा ऐसी फिसली कि सीधे चौथे पायदान पर जा अटकी-वो भी किसी विरोधी की चाल से नहीं, अपने ही घर के संजीव सिंह की दहाड़ से। ऊपर से मेयर की कुर्सी पर बैठने के बाद संजीव सिंह ने ऐसा माहौल बनाया कि पार्टी के भीतर ही कंपकंपी छूट गई। इस हार का नतीजा-बौखलाहट का लेवल हाई, लेकिन आत्ममंथन का सर्वर डाउन।
सांसद ढुलू महतो ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर पूर्व सांसद पीएन सिंह से हाथ मिला लिया-जुगलबंदी शुरू। इधर एयरपोर्ट के नाम पर पदयात्रा में भीड़ जुटाकर ताकत दिखाई, उधर विधायक राज सिन्हा भू-धंसान पर धरने में बैठकर ताकत दिखाई। मजेदार यह कि दोनों खेमों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के ‘मंच’ से ऐसे दूर हैं जैसे परीक्षा से छात्र। वहीं विधायक व मेयर संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह दोनों आंदोलनों से गायब। रणधीर वर्मा चौक की मस्तराम चौपाल में चर्चा गरम-“हार से सबक?” जवाब आया-“वो क्या होता है!” मस्तराम ने मुस्कुराते हुए कहा, “बौखलाहट तो दिख रही है, पर सुधार की फाइल शायद अभी भी ‘पेंडिंग’ है।” कुल मिलाकर, अलग-अलग आंदोलनों की यह ‘एकता’ बता रही है कि पार्टी की कहानी में अभी और ट्विस्ट बाकी है।
सिंहम स्टाइल या टाइगर रीमिक्स-कहानी का अगला सीन बाकी है!
अवैध कोयला और बालू कारोबार पर लगाम कसने के लिए कामरेड विधायक अरूप चटर्जी ने इस बार ‘सिंघम अवतार’ धारण कर लिया। समर्थकों संग मैथन टोल प्लाजा पर जनता चेकनाका लगा, ट्रकों की कतार रुकी और करीब दर्जनभर कोयला लदे वाहनों की कागजी कुंडली खुद विधायकजी ने खंगाल डाली। फिर क्या-सीधे थाने की राह। हालांकि बाद में पुलिस ने कई ट्रकों को ऐसे छोड़ दिया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
विधायकजी की इस ‘ऑन-स्पॉट थानेदारी’ से सिस्टम में हलचल तो मची, पर 24 घंटे में ही प्रशासन ने ठोस आश्वासन का मरहम लगाकर अभियान को ब्रेक दिला दिया। अब अवैध धंधे पर लगाम के लिए सात दिन की डेडलाइन दी गई है-यानि सस्पेंस बरकरार। मस्तराम की चौपाल में चेले जोश में थे-“वाह विधायकजी!” पर मस्तराम ने ब्रेक लगाया, “जरा ठहरो भाई, कहानी अभी अधूरी है।” उन्होंने पुराने ‘टाइगर एपिसोड’ की याद दिलाई-जब डुमरी टोल पर पूरी रात दहाड़ गूंजी थी, और बाद में वही सन्नाटा। अवैध गाड़ियां तब भी चलती रहीं, आज भी फर्राटा भर रही हैं। अब नजरें इस बात पर हैं कि यह ‘सिंघम स्टाइल’ सच में क्लाइमेक्स तक पहुंचेगा या फिर ‘टाइगर रीमिक्स’ बनकर रह जाएगा। तब तक-तालियां थोड़ी संभालकर बजाइए!
“डबल इंजन, आधी बिजली!”
गिरिडीह में इन दिनों “डबल इंजन” का नया अर्थ निकाला जा रहा है-एक इंजन सरकार का, दूसरा जनता के गुस्से का। वजह साफ है, शहर हो या गांव, बिजली की आंख-मिचौनी ने लोगों का धैर्य जवाब दे दिया है। हालात यह कि जहां 24 घंटे का सपना दिखाया गया था, वहां शहरी इलाकों में मुश्किल से 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 6-8 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
मंत्री जी का क्षेत्र होने के बावजूद जनता सड़कों पर उतर आई। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को “करंट” संभालने के लिए बल प्रयोग तक करना पड़ा। उधर, सहयोगी पार्टी भाकपा माले भी बिजली महाप्रबंधक से गुहार लगाती दिखी-यानी इंजन एक दिशा में, डिब्बे दूसरी दिशा में। नेता प्रतिपक्ष का इलाका धनवार भी अंधेरे में डूबा है, जहां से मुख्य सचिव तक फरियाद पहुंची। जमुआ-राजधनवार सड़क को भी बिजली संकट को लेकर लोगों ने जाम किया।
टावर चौक पर मस्तराम की चौपाल में जब चर्चा छिड़ी तो उन्होंने सीधी चेतावनी दे डाली-“साहब, बिजली-पानी ठीक कर लीजिए, नहीं तो जनता ‘स्विच ऑफ’ कर देगी।” कोरा आश्वासन से अब जनता मानने वाली नहीं है। अब सवाल यह है कि जब डबल इंजन सरकार में भी जनता अंधेरे में है, तो आखिर रोशनी किस इंजन से आएगी? खैर हम तो चुप ही रहेंगे।
विकासखंड में नई शुरुआत : जिम्मेदारी और जीवन का संतुलन
सरकारी जिम्मेदारियों के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव भी हर अधिकारी के जीवन का हिस्सा होते हैं। हाल ही में बगोदर की बीडीओ मैडम ने रांची में विवाह कर अपने जीवन की नई शुरुआत की, वहीं टुंडी के बीडीओ साहब ने देवघर में बाबा बैद्यनाथ के आशीर्वाद के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया।
इन खुशियों के अवसर पर पूरे प्रखंड क्षेत्र में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। पंचायत भवन से लेकर आम लोगों तक, हर जगह शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जिस ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ दोनों अधिकारी अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं, उसी समर्पण के साथ वे विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाएंगे।
ग्रामीणों का मानना है कि एक संतुलित और खुशहाल व्यक्तिगत जीवन, प्रशासनिक कार्यों में भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दोनों अधिकारी अपने दायित्वों और पारिवारिक जीवन के बीच बेहतर तालमेल बनाते हुए क्षेत्र के विकास को नई गति दें। इस पर दोनों कितना खरा उतरेंगे, यह समय ही बताएगा।
फिलहाल, पूरे क्षेत्र की ओर से उन्हें शुभकामनाएं-जीवन में खुशियां बनी रहें और विकास की रफ्तार भी निरंतर आगे बढ़ती रहे।