डिजिटल रिपॉजिटरी पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

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डिजिटल रिपॉजिटरी पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के गोल्डन जुबली लेक्चर थिएटर में सोमवार को “डिजिटल रिपॉजिटरी यूजिंग ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (डीस्पेस)” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय पुस्तकालय के प्रभारी प्रो. अजय मंडल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि बदलते समय में पुस्तकालयों की भूमिका तेजी से परिवर्तित हो रही है और तकनीकी प्रगति के साथ लाइब्रेरियन की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए एक इंटरएक्टिव मंच साबित होगी, जहां वे एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्राप्त करेंगे।
अपने उद्घाटन संबोधन में निदेशक प्रो. मिश्रा ने ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में पुस्तकालयों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकालयों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक उपकरणों के समावेश से पुस्तकालयों की प्रासंगिकता और उपयोगिता और अधिक बढ़ेगी।
केंद्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन पार्थ डे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज के सूचना युग में डिजिटल रिपॉजिटरी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को संस्थागत ज्ञान संसाधनों के निर्माण, प्रबंधन और प्रसार के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रधान अन्वेषक डॉ. बी. सुत्रधर ने प्रतिभागियों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि एनडीएलआई देश के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो शैक्षणिक संसाधनों को सभी तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्थानों को डिजिटल रिपॉजिटरी स्थापित करने में तकनीकी सहायता और क्लाउड आधारित सर्वर सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पुस्तकालय के उप-लाइब्रेरियन सतीश कुमार भी मंचासीन रहे, जबकि सहायक लाइब्रेरियन सौरव देबनाथ ने उद्घाटन सत्र का संचालन किया।
दो दिवसीय इस कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को डिजिटल रिपॉजिटरी के आर्किटेक्चर, मेटाडाटा मानकों, कंटेंट सबमिशन प्रक्रिया और डिजिटल संरक्षण के सर्वोत्तम तरीकों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर डी-स्पेस (DSpace) के माध्यम से संस्थागत रिपॉजिटरी के निर्माण और प्रबंधन की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाएगी। कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

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