भाजपा सरकार के दबाव में कोल इंडिया प्रबंधन ने लिया सलाना बोनस का निर्णय: एके झा
डीजे न्यूज, धनबाद: राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन (इंटक) के महामंत्री एके झा तथा कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र प्रसाद सिंह (वरीय अधिवक्ता) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि कोल इंडिया लिमिटेड में सालाना बोनस के फैसले ने कई महत्वपूर्ण सवाल कोयला मजदूर परिवार के सामने खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन राजनीतिक साजिश का शिकार होकर बहुत जल्दीबाजी में भाजपा सरकार के दबाव में ऐसा निर्णय करने के लिए बाधित हुआ है। आज तक बोनस के सवाल पर निर्धारित बैठक जेबीसीसीआई के प्रतिनिधि किया करते थे। इस बैठक में कोल इंडिया लिमिटेड के सभी कंपनी के सी. एम. डी या डायरेक्टर (पर्सनल) या डायरेक्टर (फाइनेंस) उपस्थित रहा करते थे और वार्ता में अपनी हिस्सेदारी दिया करते थे। पहली बार अपेक्स बॉडी में समझौता हुआ। पहली बार इस समझौते पर किसी भी कंपनी का सी. एम. डी या उसके प्रतिनिधि का हस्ताक्षर नहीं हुआ है। पिछले वर्ष के अनुपात में अगर बोनस की राशि में कोई भी बढ़ोतरी होना संभव नहीं था तो पिछले साल की तरह एग्रीमेंट कम से कम 113000 पर ना होने का अर्थ कहीं से भी कोयला मजदूरों के समझ में नहीं आ रहा है।
इंडियन नेशनल माइंस वर्कर फेडरेशन को राजनीतिक अछूत घोषित करके,भाजपा सरकार के राजनीतिक साजिश का शिकार होकर कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन ने अपने द्वारा घोषित 50000 कोयला श्रमिकों की आवाज को दबाने का काम किया है, उन्हें न्याय से वंचित रखा गया है। उनके राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार की हत्या की है, जो दुखद है।
झा ने कहा कि वर्ष 2010 की तरह कोयला मजदूर इस घोषित राशि का भुगतान भी लेंगे, इस निर्णय पर पुनः विचार करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन को विनम्र अपील के साथ नोटिस भी देंगे। इसके साथ-साथ आउटसोर्सिंग/ठेका में कार्य कर रहे लगभग 2 लाख 50000 श्रमिकों को डिपार्टमेंटलाइज करने, समान कार्य के लिए समान वेतन और सामान बोनस की मांग और संघर्ष करेंगे। इस पर सभी कोल फेडरेशन और सभी ट्रेड यूनियन के सहयोग की अपील भी करेंगे।