अनशन पर बैठे अरूप को मिला मथुरा का साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बदहाल स्थिति पर रखी बात

अनशन पर बैठे अरूप को मिला मथुरा का साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बदहाल स्थिति पर रखी बात

डीजे न्यूज, धनबाद: शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बीते तीन दिनों से  समाहरणालय के समक्ष धरना-अनशन पर बैठे विधायक अरूप चटर्जी के समर्थन में गुरुवार को टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनके साथ आइसा संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी अनशन का समर्थन किया। इस दौरान मथुरा प्रसाद महतो ने मीडिया से बातचीत में ग्रामीण शिक्षा की बदहाल स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी।

मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि विधायक अरूप चटर्जी तीन दिन से जिला मुख्यालय में अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग चिर-परिचित मांग है। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उसको दुरुस्त करने के लिए यह अनशन हो रहा है। सभी की मानसिकता ऐसी हो गई है कि शिक्षक को ग्रामीण क्षेत्र से निकालकर शहरी क्षेत्र में लाया जाता है। हम इसका विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा कि कई बैठकों में हम लोग इस बात को रख चुके हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जितनी बच्चों की संख्या है, उस अनुपात में शिक्षक नहीं हैं। ऐसे-ऐसे जगह हैं जहां छात्रों की संख्या ज्यादा है, लेकिन शिक्षक बहुत कम हैं। जो शिक्षक गांव में जाता है, वह किसी तरह शहर में आ जाता है। इसके विरोध में अरूप चटर्जी का अनशन है, हम इसका समर्थन करते हैं। इस तरह का काम नहीं होना चाहिए और इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए।

मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षक को वहां अधिक से अधिक दिया जाना चाहिए। नियम भी है कि कोई भी शिक्षक एक जगह पांच साल से ज्यादा नहीं रहेगा, लेकिन आंकड़ा देखा जाए तो पंद्रह से बीस साल तक भी लोग शहर में ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे लोगों की जांच होनी चाहिए और सुधार लाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अनशन के जरिए जनता के बीच जो संदेश दिया गया है, हम अपनी तरफ से इस मुद्दे पर इनका समर्थन करते हैं। जिला प्रशासन से भी हम बात करेंगे। विधायकों की जिला प्रारंभिक समिति की बैठक बहुत दिनों से नहीं हुई है, उसकी जल्द से जल्द बैठक बुलाई जाए।

उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायक अरूप चटर्जी का सुध लेने वाला कोई नहीं आया। न जिला प्रशासन आया। जिला शिक्षा पदाधिकारी से बात हुई, लेकिन उपायुक्त से लेकर बाकी वरिष्ठ पदाधिकारी आएं, सुध लें और इसका जल्द से जल्द निराकरण करें।

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