आंसुओं और जय माता दी के जयकारों के बीच विदा हुईं बड़की मैया-छोटकी मैया

आंसुओं और जय माता दी के जयकारों के बीच विदा हुईं बड़की मैया-छोटकी मैया

मानसरोवर तालाब में हुआ प्रतिमा विसर्जन

डीजे न्यूज, गिरिडीह : मां दुर्गा की विदाई की बेला आई तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। मन में बिछड़ने का दर्द था, तो जुबां पर जय माता दी के जयकारे। बड़ा चौक में बड़की मैया और छोटकी मैया की विदाई का दृश्य श्रद्धा, भावुकता और भक्ति के अनूठे संगम का गवाह बना। मां को अंतिम विदाई देने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर भक्त की आंखों में मां के प्रति अटूट विश्वास और अगले साल उनके फिर से आगमन की उम्मीद नजर आई।

विदाई की रस्म के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मां को कोइछा दिया। इसके बाद सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान माहौल भावुक होने के साथ-साथ भक्तिमय भी बना रहा।

**कंधों पर मां की प्रतिमा, जुबां पर जयकारे**

वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अपने कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराया। विभिन्न मार्गों से गुजरते विसर्जन जुलूस में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धा और उत्साह से भरे श्रद्धालुओं के बीच मां की विदाई का कारवां बरवाडीह स्थित मानसरोवर तालाब पहुंचा, जहां पूरे विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

**विदाई में छलकी पीड़ा, अगले साल आने की लगाई गुहार**

मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही दुर्गा पूजा का उत्सव संपन्न हो गया, लेकिन भक्तों के मन में मां के प्रति आस्था और भक्ति की ज्योति जलती रही। विदाई के क्षणों में श्रद्धालुओं की प्रार्थना थी कि मां अगले वर्ष फिर आएं और सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

बड़की मैया और छोटकी मैया की भावुक विदाई ने एक बार फिर साबित किया कि मां दुर्गा श्रद्धालुओं के लिए केवल आराध्य नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और भावनाओं का अटूट केंद्र हैं। मां की विदाई के साथ बड़ा चौक का उत्सवी माहौल भले ही थम गया, लेकिन भक्तों के हृदय में अगले वर्ष मां के स्वागत की प्रतीक्षा शुरू हो गई।

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