आईआईटी (आईएसएम) का एसीएमई और हाइरीवील के साथ जियोलॉजिक हाइड्रोजन रिसर्च के लिए एमओयू
डीजे न्यूज, धनबाद : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद ने एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और हाइरीवील, रुई-माल्मेज़ों, फ्रांस के साथ जियोलॉजिक हाइड्रोजन की संभावनाओं के आकलन और स्टिम्युलेटेड हाइड्रोजन प्रोडक्शन के लिए कैटेलिस्ट डेवलप करने को लेकर त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया है। यह एमओयू शुरू में 24 महीने के लिए प्रभावी रहेगा।
एमओयू के मौके पर आईआईटी (आईएसएम) के डिप्टी डायरेक्टर और डायरेक्टर (करंट ड्यूटी) प्रो. सरत कुमार दास और पद्मश्री डॉ. Rabi Bastia, चेयरमैन के सलाहकार, एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड मौजूद थे। इस दौरान डीन एलुमनी अफेयर्स प्रो. राजीव उपाध्याय, एप्लाइड जियोलॉजी के एचओडी प्रो. शुशांता सारंगी, एप्लाइड जियोफिजिक्स के एचओडी प्रो. सौमेन मैती, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एचओडी प्रो. विकास महतो, एप्लाइड जियोफिजिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रो. राज किरण और पीआरओ श्री मृत्युंजय शर्मा समेत अन्य फैकल्टी सदस्य और एसीएमई व हाइरीवील के प्रतिनिधि मौजूद थे। एमओयू के तहत हाइड्रोजन पोटेंशियल असेसमेंट, रॉक अल्टरेशन स्टडी और स्टिम्युलेटेड हाइड्रोजन प्रोडक्शन के लिए कैटेलिस्ट डेवलपमेंट पर काम होगा। इसमें मिनरलॉजिकल डेटा और जमीन के अंदर की परिस्थितियों के आधार पर हाइड्रोजन बनने की क्षमता का आकलन, रॉक सैंपल की स्टडी और हाइड्रोजन प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए उपयुक्त कैटेलिस्ट की पहचान की जाएगी। प्रोजेक्ट के आगे विस्तार के लिए संभावित क्षेत्रों की भी पहचान होगी।
आईआईटी (आईएसएम) की टीम पिछले दो वर्षों से जियोलॉजिक हाइड्रोजन के क्षेत्र में काम कर रही है। प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता और प्रो. राज किरण के नेतृत्व वाली टीम के पास रिजर्वायर इंजीनियरिंग, एक्सप्लोरेशन जियोफिजिक्स और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता है। टीम ने भारत में आयरन ओर डिपॉजिट्स की जियोलॉजिकल हाइड्रोजन प्रॉस्पेक्टिविटी पर रिसर्च पेपर भी प्रकाशित किया है। समझौते के तहत एसीएमई रॉक सैंपल और रिसर्च के लिए फंड उपलब्ध कराएगा, जबकि आईआईटी (आईएसएम) नेचुरल हाइड्रोजन, ऑयल एंड नेचुरल गैस और रिजर्वायर मॉडलिंग से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगा। संस्थान हाइड्रोजन रिसोर्स असेसमेंट, उपयुक्त कैटेलिस्ट की पहचान और स्टिम्युलेटेड हाइड्रोजन प्रोडक्शन की व्यवहारिकता पर काम करेगा। यह सहयोग एकेडमिक एक्सपर्टाइज, इंडस्ट्री रिसोर्स और इंटरनेशनल डीप-टेक क्षमता को एक साथ लाकर नेचुरल और जियोलॉजिक हाइड्रोजन के क्षेत्र में रिसर्च को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। प्रोजेक्ट को फंड जारी होने के बाद 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।