आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-ज़मीन पर षड्यंत्र एवं प्रहार बर्दाश्त नहीं: सीपीआईएम
मई में दुमका आयुक्त कार्यालय पर होगा आदिवासियों का विशाल महाजुटान
डीजे न्यूज, दुमका: संताल परगना के जनजातीय क्षेत्रों में कॉरपोरेट-राज्य गठजोड़ द्वारा किए जा रहे सुनियोजित भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के दमन के खिलाफ सीपीआईएम (भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी) ने आर-पार के संघर्ष का ऐलान कर दिया है। पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गाँवों का दौरा किया, जिसमें राज्य सचिव कॉम प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम, अमल आज़ाद और जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे।
संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन
टीम ने पाया कि जिला प्रशासन और एमडीओ (MDO) स्थानीय दलाल तत्वों के साथ मिलकर वनाधिकार अधिनियम (FRA), पेसा (PESA) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहे हैं। बिना ग्राम सभा की अनुमति के किए जा रहे सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएँ पूरी तरह असंवैधानिक और अवैध हैं।
प्रशासनिक अवरोध और पट्टा दावे
क्षेत्र में वनाधिकार के दर्जनों आवेदन वर्षों से लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, लंबित दावों (विशेषकर PVTG समूहों के) का निपटारा किए बिना जबरन विस्थापन की तैयारी की जा रही है, जो कानूनी रूप से अनुचित है।
ग्राम सभाओं की अनदेखी
प्रशासन ने पेसा (PESA) के तहत ग्राम सभाओं की सर्वोच्चता को दरकिनार कर दिया है। ग्रामीणों में व्याप्त अज्ञानता का लाभ उठाकर डराने-धमकाने और दबाव की राजनीति की जा रही है।
गाँवों का सामूहिक संकल्प और आगामी रणनीति
ग्राम सभा का गठन
प्रभावित गाँवों के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय प्रधानो को 10 दिनों के भीतर औपचारिक ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है, ताकि ‘वन अधिकार समिति’ का गठन और नए दावों का पंजीकरण हो सके।
दस्तावेजी प्रमाण
ग्राम सभा की कार्यवाही और प्रस्तावों को राज्यपाल, भारत के राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजा जाएगा।
संगठनात्मक लामबंदी
एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है जो ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण और कानूनी लड़ाई की निगरानी करेगी।
विशाल प्रदर्शन
इस लूट और दमन के विरोध में मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष बड़ी संख्या में ग्रामीणों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी अंतिम रूपरेखा 10 मई को होने वाली जिला कमेटी की बैठक में तय होगी।
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदिवासियों को उनकी पैतृक ज़मीन से बेदखल करने की किसी भी साजिश का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा का जन-आंदोलन है। जब तक अंतिम व्यक्ति का वनाधिकार दावा सुरक्षित नहीं होता, एमडीओ का एक भी पहिया आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा।