किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखना प्राथमिकता : हेमंत सोरेन

किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखना प्राथमिकता : हेमंत सोरेन

 एचपीवी टीकाकरण पर गहन अध्ययन के बाद ही होगा निर्णय

 मुख्यमंत्री ने राज्यव्यापी सर्वेक्षण, विशेषज्ञ समिति के गठन एवं देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेने का दिया निर्देश।

रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन, 7 सुपर स्पेशियलिटी एवं 3 ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन के प्रस्ताव पर हुई चर्चा

राज्य के मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं एवं सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर

डीजे न्यूज, रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। बैठक में राज्य की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण, रिम्स में चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, राज्य के मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं तथा सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

एचपीवी टीकाकरण पर पहले हो गहन अध्ययन, विशेषज्ञों की राय के बाद ही आगे बढ़े

बैठक में राज्य की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रस्तावित एचपीवी टीकाकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि झारखंड में सर्वाइकल कैंसर के मामलों का अनुमानित आंकड़ा प्रति एक लाख आबादी पर 13 है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की बेटियों एवं महिलाओं का स्वास्थ्य हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। इसके बचाव एवं रोकथाम के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ आवश्यक कदम उठाएगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एचपीवी टीकाकरण के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने से पहले इस विषय पर व्यापक एवं गहन अध्ययन किया जाए। इसके लिए पूरे राज्य में सर्वेक्षण कराकर सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, आयु वर्ग, बीमारी के विभिन्न चरणों (स्टेज-वाइज) तथा सक्रिय मामलों का विस्तृत आंकड़ा एकत्रित किया जाए। इसके आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया।

मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विशेषज्ञों की समिति गठित करने तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, कैंसर विशेषज्ञों एवं संबंधित विषय के विशेषज्ञों से परामर्श लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि एचपीवी टीकाकरण के वैज्ञानिक, तकनीकी, चिकित्सकीय एवं सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाए। सभी तथ्यों एवं विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही इसके क्रियान्वयन के संबंध में आगे निर्णय लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील विषयों पर सरकार पूरी गंभीरता, सतर्कता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह भी निर्देश दिया कि इस विषय को लेकर समाज में किसी प्रकार की अफवाह अथवा भ्रांति की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके लिए विभाग द्वारा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए तथा लोगों को प्रमाणिक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान एवं रोकथाम के लिए नियमित स्क्रीनिंग व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने जिला अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में पैप स्मीयर टेस्ट तथा एचपीवी डीएनए टेस्ट जैसी आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता एवं पहुंच बेहतर बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर जांच, जागरूकता एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग प्रभावी एवं समन्वित कार्ययोजना तैयार करे।

रिम्स में चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में रांची स्थित राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने रिम्स में संचालित विभिन्न विभागों के अंतर्गत उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों को मिल रहे उपचार, ओपीडी व्यवस्था, मेडिकल सीटों, छात्रावासों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली।

इस दौरान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के स्वीकृत पदों के पुनर्गठन एवं चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव के अनुसार रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के कुल 319 स्वीकृत पदों का पुनर्गठन किया जाना है। इसके तहत 7 सुपर स्पेशियलिटी विभागों एवं 3 ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 16 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया।

प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत मेडिकल शिक्षकों के पदों का श्रेणीवार विवरण

प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के पदों की श्रेणीवार संख्या में बदलाव किया जाना है। इसके अनुसार, प्राध्यापक के वर्तमान 44 पदों के स्थान पर 42 पद, अपर प्राध्यापक के 09 पदों के स्थान पर 08 पद, सह-प्राध्यापक के वर्तमान 95 पदों के स्थान पर 96 पद तथा सहायक प्राध्यापक के 170 पदों के स्थान पर 172 पद प्रस्तावित हैं। वहीं, सहायक प्राध्यापक-सह-सांख्यिकी के 01 पद में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इस प्रकार, पुनर्गठन के बाद भी मेडिकल शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 319 ही रहेगी। प्रस्तावित पुनर्गठन का उद्देश्य रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना, सुपर स्पेशियलिटी एवं ब्रॉड स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करना तथा योग्य मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे संस्थान की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने रिम्स की समग्र व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य के इस महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान में मरीजों को बेहतर उपचार एवं विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होनी चाहिए।

हजारीबाग, दुमका एवं पलामू मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था की भी हुई समीक्षा

बैठक में रिम्स के अतिरिक्त हजारीबाग, दुमका एवं पलामू स्थित मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय व्यवस्था की भी विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। इन संस्थानों में उपलब्ध आधारभूत संरचना, मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधाओं एवं अन्य आवश्यक संसाधनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में समन्वित प्रयास करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभ पर चर्चा

बैठक में राज्यवासियों को सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत उपलब्ध स्वास्थ्य लाभों तथा इनके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने से संबंधित प्रावधानों एवं आयुष्मान भारत योजना के साथ इसके समन्वय पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक इन योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे तथा जरूरतमंद लोगों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर

बैठक में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति एवं इनके प्रभावी संचालन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एम्बुलेंस व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को और दृढ़ता के साथ मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, चिकित्सा शिक्षा एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए आम लोगों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी पहल सुनिश्चित करें।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारीगण, विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निदेशक एवं भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top