खोरठा साहित्य में भीम कुमार भारत का बढ़ा मान, दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे गए
300 से अधिक रचनाओं के रचयिता भीम कुमार को मिला शिवनाथ प्रमाणिक स्मृति युवा सम्मान एवं सहिया साहित्य सम्मान
डीजे न्यूज, गिरिडीह : खोरठा भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिक्षक, कवि एवं साहित्यकार भीम कुमार भारत को शिवनाथ प्रमाणिक स्मृति युवा सम्मान और सहिया साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद में झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति और खोरठा पत्रिका ‘सहिया’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांचवें अलंकरण समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से गिरिडीह के साहित्यिक जगत में हर्ष का माहौल है।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राम कुमार सिंह, समिति के अध्यक्ष शिरोमणि महतो, डॉ. मुकुंद रविदास और ‘सहिया’ के संपादक अनिल कुमार गोस्वामी ने भीम कुमार भारत को पुष्पगुच्छ, शॉल, प्रशस्ति पत्र, अकादमी सम्मान पत्र और पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों में 15 को झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति और 46 को ‘सहिया’ पत्रिका की ओर से सम्मानित किया गया। इस दौरान साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर साहित्यिक वातावरण को जीवंत बनाया।
**खोरठा रचना ने बांधा समां**
भीम कुमार भारत ने अपनी खोरठा रचना ‘अयथिन कहिया पिया मोर गो, पुटूस फुला फुलाय लगलइ’ प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी। उनकी रचना ने खोरठा भाषा की साहित्यिक समृद्धि और लोकभावनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
**300 से अधिक रचनाओं से बनाई पहचान**
भीम कुमार भारत हिंदी और खोरठा साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनकी पहली काव्य पुस्तक ‘बिखरे फूल’ और दूसरी पुस्तक खोरठा काव्य संग्रह ‘हमर सोना झारखंड’ प्रकाशित हो चुकी है। कविता, कहानी, गीत और गजल सहित वे अब तक 300 से अधिक रचनाएं लिख चुके हैं। उनकी रचनाएं देश के विभिन्न राज्यों में प्रकाशित होती रही हैं। इससे पहले भी उन्हें कई साहित्यिक मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे जाने पर शिक्षाविदों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और मित्रों ने भीम कुमार भारत को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।